किसकी नज़र लगी खूबसूरत हिमाचल को जो…..!

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हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून कुदरत का कहर देखने को मिला है। मॉनसून शुरू हुआ तो किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया होगा कि इस बार की बारिश लोगो के आशियाने छीन लेगी। कई परिवार बेघर हो जायेंगे। उनके अपने उनसे दूर हो जायेंगे। 9 और 10 जुलाई 2023 की वो तारीख जब प्रदेश के कोने कोने से तबाही का वो खतरनाक मंज़र सामने आया। जहाँ नदी नालों ने अपना रौद्र रूप दिखाया वहीँ भूस्खलन से कई पहाड़ ढह गए, और उन पहाड़ो के साथ ढह गए लोगो के आशियाने। इस साल हुई कुछ भयानक घटनाओं पर नज़र डाले तो कुल्लू, मनाली, सोलन, मंडी और शिमला की दल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आती है। जिसमें हज़ारो लोग बेघर हो गए। हज़ारो लोग के आशियाने उन से छिन गए। इस साल हुई तबाही की कुछ झलकियां आपको दिखा देते है।

मनाली में ब्यास का रौद्र रूप

10 जुलाई 2023 जब ब्यास नदी के रौद्र रूप ने सबको डरा दिया। इस दौरान ब्यास नदी ने कई आशियाने छीन लिए। ताश के पत्तो की तरह घर, गाड़ियां बहती हुई नजर आई। कई जगह सड़कों का नामों निशान मिट गया। प्रकृति का इतना खौफनाक मंजर शायद ही किसी ने हिमाचल में पहले देखा होगा। कई लोग की जान चली गयी। एक PRTC की बस बह गयी। 52 साल बाद ब्यास ने जिला कुल्लू में भारी तबाही मचाई। इस बार जो नुकसान हुआ, वह कई हज़ार करोड़ में था। नदी का रुख मुड़ने से पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंचा, जो तबाही का कारण बना।

नदी का तटीयकरण न होने से भी पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया। मनाली से कुल्लू-भुंतर व औट तक ब्यास ने भारी नुकसान पहुंचाया है। नदी तटों पर बने मकान, दुकानें, होटल व होमस्टे सब पलभर में बह गए। बाहंग को लें तो यहां पानी ने अपना रुख मोड़ लिया और नदी के किनारे बने मकान तो चपेट में आए हैं, साथ में नदी से कोसों दूर स्थित भवनों को भी पानी के तेज प्रवाह ने नहीं छोड़ा। आलू ग्राउंड में भी ऐसा ही मंजर देखने को मिला। नदी तटों से अवैध रूप से खनन करना नदी का रुख मुड़ने की वजह माना जा रहा रहा है।

सोलन में भूस्खलन

मनाली के साथ साथ उसी दिन सोलन के शामती में भी तबाही साफ़ देखने को मिली। जब रात करीब 3 बजे पहाड़ी के साथ मलबा डमरोग से शामती पहुंचा तो अपने साथ साथ कई घर और साईं मंदिर का गेट भी तबाह हो गया। तबाही का सिलसिला यहीं नहीं रुका, उसके बाद भी कई दिनों तक कई घर एक घर करके गिरते रहे। जिसके चलते शामती को भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील घोषित कर दिया,और कई घरो को खाली करवाया गया। लोग अपना घर होते हुए भी बेघर हो गए। लोग इस दौरान अपने रिश्तेदारों के घर रहने को मजबूर हो गए। राजगढ़-सोलन मार्ग काफी दिन बाधित रहा।

लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी के साथ कालका शिमला NH -5 चक्कीमोड़ के पास 50 मीटर का हिस्सा सड़क के साथ ही धंस गया था। जिसके बाद मार्ग पर हर दिन मशीनरी एक महीने तक तैनात रही। हर दिन मार्ग को दिन में कई बार वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जाता, लेकिन फिर सड़क पर मलबा आ जाता. चक्कीमोड़ से लेकर सोलन तक सड़क में बड़ी बड़ी दरारे आ गयी है। जिसे देख कर ही डर लग जाता है।

मंडी में तबाही

मंडी में भी बारिश के कारण ब्यास नदी उफान पर थी। नदी की तेज धारा ने और बाढ़ के तेज पानी ने सड़कों को तोड़ दिया है। 100 साल पुराना पुल टूट गया। ब्यास नदी के किनारे के कई घर बाढ़ के पानी में डूब गए। तट के ठीक बगल के घर बह गए। जबकि, कुछ पानी में डूब गए हैं। लोग सहम गए। इतनी तबाही मंडी के लोगों ने इससे पहले कभी नहीं देखी होगी। शिव का पंचवक्त्र मंदिर पानी के आगोश में था। मंदिर को जाने का रास्ता ख़त्म हो गया था। जहाँ ब्यास सब कुछ बहा कर ले जा रही थी। वहीँ इस मंदिर को खरोच तक नहीं आई।

इस घटना ने 9 साल पहले 2013 में हुई उत्तराखंड के केदारनाथ में हुई त्रासदी की याद दिला दी। उस त्रासदी में भी हज़ारो लोग मारे गए थे। जो भी चीज पानी के रस्ते में आई सब तबाह हो गयी थी। लेकिन केदारनाथ मंदिर को कोई क्षति नहीं हुई। ऐसा ही वाक्य मंडी के पंचवक्त्र मंदिर में भी देखने को मिला।

शिमला के शिव बावड़ी मंदिर पर भूस्खलन

शिमला के समरहिल क्षेत्र में शिव बावड़ी मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार को भारी भूस्खलन हुआ। जिसकी चपेट में शिव बावड़ी मंदिर आ गया। सावन का सोमवार होने के चलते लोग सुबह से ही मंदिर में दर्शनों के लिए गए हुए थे। जो इस भूस्खलन के चलते मलबे में दब गए। इस भूस्खलन में 25 लोग मलबे की चपेट में आ गए और इस दुनिया को अलविदा कह गए। हर तरह चीख पुकार थी। कई लोगो ने इस घटना में अपनों को खो दिया। लोग अपनों को मिट्टी हटा कर खुद ही तलाश कर रहे थे। लोगो को समझ नहीं आया कि यह अचानक क्या हो गया। सुबह तक जो परिवार हस्ते खलते अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे।

आज वहां सन्नाटा छाया हुआ था। एक 4 साल की बच्ची ने अपने माता पिता को खो दिया। वहीँ विश्वविद्यालय में प्रो. रहे पीएल शर्मा, उनकी पत्नी और उनका एक बेटा इस मलबे में डाब कर मर गए। अब उस घर में केवल उनका एक बेटा ही रह गया। यह घटना जिस किसी ने देखी, सबका दिल सहम गया। इनके अलावा भी कई शव मलबे से निकाले गए। इस घटना में एक व्यक्ति श्याम सरण ज़िंदा बच गए। मानो जैसे कोई चमत्कार हुआ हो।

प्रदेश में आई इस आपदा में 10 हजार करोड़ का नुक्सान हुआ। प्रदेश सहम उठा था। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जान-माल का खासा नुकसान प्रदेश में हुआ है। प्रदेश में जुलाई में हुई तबाही में अब तक कम से कम 330 लोगों की मौत हो चुकी है। 35 लोग लापता हैं। 12 हजार घर तबाह हुए हैं। हाईवे जगह-जगह बह गए। हर ओर बारिश ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसका अंदाजा नहीं लगाया गया। लेकिन हिमाचल एक बार फिर स्वस्थ होगा।

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