देवभूमि में नवरात्रि काआगाज, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

देवभूमि में नवरात्रि का आगाज, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

Navratri begins in Devbhoomi, a wave of faith pours into the temples.

शिमला/ऊना/कांगड़ा।  ( SHIMLA,UNA,KANGRA ) चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही हिमाचल प्रदेश में भक्ति और आस्था का माहौल चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों सहित अन्य देवी मंदिरों में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और विभिन्न राज्यों से सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिरों में “जय माता दी” के जयकारों के बीच सुबह से ही भंडारा, हवन और कन्या पूजन का आयोजन किया जा रहा है।

शक्तिपीठों में रौनक 

चिंतपूर्णी मंदिर, ज्वालाजी मंदिर, बृजेश्वरी देवी मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर और नैना देवी मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं। सभी मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक लाइटों से सजाया गया है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा है।

भव्य सजावट 

ऊना स्थित चिंतपूर्णी मंदिर इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां दिल्ली के श्रद्धालु प्रवीण क्वात्रा द्वारा करीब 50 लाख रुपये की लागत से विदेशी फूलों से मंदिर को सजाया गया है, जिसकी खुशबू और भव्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।

दर्शन व्यवस्था 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में बेहतर प्रबंधन किया गया है। अमृतसर से आए श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए कहा कि दर्शन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है और भीड़ के बावजूद व्यवस्था सुचारू है।

खुले रहेंगे कपाट 

नवरात्रि के दौरान चिंतपूर्णी मंदिर के कपाट 23 घंटे तक खुले रहेंगे। केवल एक घंटे के लिए सफाई के उद्देश्य से मंदिर बंद किया जाएगा। सुरक्षा के लिए यहां 300 से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं।

शिमला में तैयारी 

शिमला के कालीबाड़ी मंदिर और तारादेवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों के कपाट सुबह 6 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। साथ ही, अतिरिक्त बस सेवाएं और सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं।

सुरक्षा के इंतजाम 

प्रदेशभर में 1300 से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं। कई स्थानों पर CCTV और ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। शक्तिपीठों में हथियार ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

नवरात्रि महत्व 

चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के माध्यम से देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

शुभ मुहूर्त 

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना की जाती है। इस वर्ष घट स्थापना के दो शुभ मुहूर्त हैं—सुबह 6:54 से 7:58 बजे और दोपहर 12:05 से 12:53 बजे।

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