धर्मशाला कॉलेज में छात्रा मौत की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी करेगी जांच

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The facts surrounding the college funeral—the funeral committee investigation.

kangra: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की पूर्व छात्रा पल्लवी की मौत से जुड़े रैगिंग (Ragging) और मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) के गंभीर आरोपों ने अब राष्ट्रीय स्तर (National Level) पर ध्यान खींच लिया है। छात्रा की मौत के बाद सामने आए सवालों, वायरल वीडियो बयानों और परिजनों के आरोपों के बीच अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission – UGC) ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप किया है।

छात्रा की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल (Serious Questions)

UGC ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल एक कॉलेज या एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र सुरक्षा (Student Safety) और शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal Mechanism) की वास्तविक स्थिति को परखने की कसौटी है।

फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के निर्देश (Fact-Finding Committee)

UGC ने पल्लवी की मौत और उससे जुड़े रैगिंग आरोपों को गंभीर मानते हुए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (Fact-Finding Committee) गठित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई (Strict Action) की जाएगी।

साथ ही UGC यह भी जांच करेगा कि कॉलेज में एंटी-रैगिंग सेल (Anti-Ragging Cell), शिकायत निवारण तंत्र (Complaint Mechanism) और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े नियम वास्तव में कितने प्रभावी हैं और क्या इन्हें सही ढंग से लागू किया गया था या नहीं।

परिजनों की शिकायत पर FIR दर्ज (FIR Registered)

मृतक छात्रा के परिजनों की शिकायत पर भूगोल के प्रोफेसर अशोक कुमार सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इन पर रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच (Investigation) शुरू कर दी है।

पोस्टमार्टम नहीं, जांच बनी चुनौती (Major Challenge)

DSP निशा कुमारी के नेतृत्व में पुलिस टीम देर रात तक छात्रा के घर पर जांच करती रही। हालांकि छात्रा का पोस्टमार्टम (Postmortem) नहीं हुआ और अंतिम संस्कार पहले ही किया जा चुका है, जिससे पुलिस के सामने भौतिक सबूत (Physical Evidence) जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में अब जांच का फोकस डिजिटल साक्ष्यों (Digital Evidence) पर केंद्रित है।

इन अहम सुरागों पर टिकी जांच (Key Evidence)

  • डाइंग डिक्लेरेशन (Dying Declaration): इलाज के दौरान रिकॉर्ड किए गए छात्रा के वीडियो बयान जब्त किए गए हैं, जिन्हें सबसे अहम सबूत माना जा रहा है।

  • मेडिकल हिस्ट्री (Medical History): विभिन्न अस्पतालों से मेडिकल रिपोर्ट्स, एक्स-रे, सीटी स्कैन और ब्लड रिपोर्ट्स मंगवाई गई हैं।

  • डिजिटल जांच (Digital Investigation): मृतका, आरोपी प्रोफेसर और अन्य छात्राओं के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स और डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच की जाएगी।

सिलसिलेवार पूरा मामला (Case Timeline)

  • रैगिंग के आरोप (Ragging Allegations): छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज धर्मशाला में द्वितीय वर्ष की छात्रा थी।

  • प्रोफेसर पर बैड टच का आरोप (Bad Touch Allegation): वीडियो बयान में छात्रा ने तीन छात्राओं और एक प्रोफेसर पर मारपीट, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए।

  • नाम काटे जाने का विवाद (Admission Dispute): एक नंबर से फेल होने के बाद छात्रा का नाम कॉलेज से काट दिया गया।

  • डिप्रेशन का दावा (Depression): परिजनों के अनुसार, कथित उत्पीड़न के बाद छात्रा गहरे डिप्रेशन में चली गई।

  • CM हेल्पलाइन शिकायत (CM Helpline): गंभीर हालत में परिजनों ने शिकायत दर्ज करवाई।

  • इलाज के दौरान मौत (Death During Treatment): लुधियाना के DMC अस्पताल में 26 दिसंबर को छात्रा की मौत हो गई।

सिस्टम पर उठे सवाल (System Failure?)

UGC के हस्तक्षेप के बाद यह मामला अब केवल पुलिस जांच या FIR तक सीमित नहीं रहा। कॉलेज प्रशासन की भूमिका, शिकायतों पर कार्रवाई में देरी और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब आने वाले दिनों में फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट (Committee Report) यह तय करेगी कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी था या फिर सिस्टम की गंभीर चूक (Systemic Failure), जिसकी कीमत एक छात्रा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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