हिमाचल से संबंध रखने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री कँगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिये राहत कोष में पैसा जमा ना होने पर हिमाचल सरकार पर सवाल उठाये है। हिमाचल में आयी आपदा के बाद हिमाचल के लोगों द्वारा हिमाचल से जुड़ी हस्तियों को ट्रोल किया जा रहा था, कि कोई भी ऐसे समय में हिमाचल की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा। अब कँगना रनौत द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ये कहा जा रहा है 50-60 बार उनकी टीम पैसे डोनेट करने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन आपदा राहत कोष वाले खाते में पैसे जमा नहीं हो पा रहे। साथ में सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा गया है सरकार द्वारा आपदा राहत कोष भी नहीं सम्भला जा रहा ये शर्म की बात है।
वहीँअब अभिनेत्री की फेसबुक पोस्ट के बाद प्रदेश में सियासी माहौल भी गर्म हो गया है. इस पर अब मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
कंगना रनौत पर टिप्पणी करने से बचते नजर आये नरेश चौहान
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान इस दौरान कंगना रनौत पर सीधी टिप्पणी करने से तो बचते हुए नजर से. मगर अप्रत्यक्ष रूप से नरेश चौहान ने कंगन को जवाब देते हुए कहा कि जब से राहत कोष की स्थापना हुई है इसमें लोगों ने बढ़-चढ़ कर दान दिया उन्होंने कहा कि आंकड़ा 200 करोड़ के ऊपर जा चुका है और छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लक से भी पैसे दिए हैं.
नरेश चौहान ने कहा कि दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री ने भी करोड़ों की मदद दी तो आमिर खान जैसे अभिनेता ने भी सहायता दी और अपनी पहचान भी गोपनीय रखी. मगर इस तरह की कोई शिकायत देखने को नहीं मिली. उन्होंने कंगना पर निशाना साधते हुए कहा कहा कि सभी ने अपने-अपने भाव से आपदा राहत कोष में अंश दान दिया है. लिहाजा कौन किस भावना से दे रहा है इस पर इस पर कुछ भी कहना उचित नहीं. जो कोई भी मदद दे रहा है उन सब का सरकार आभार जताती है.
सरकार का खजाना खाली : नरेश चौहान
वहीं वाटर सेस को लेकर कंपनियों को भेजे गए नोटिस पर प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा की कांग्रेस जब सत्ता में आई तो सरकार का खजाना खाली था. ऐसे में सरकार की प्रतिबद्धता प्रदेश सरकार के स्रोत बढ़ाने में है. इसी कड़ी में वॉटर सेस लगाया गया उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है और बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा की जरूरत हुई तो वाटर सेस पर लगाई गई दरों पर सरकार कंपनियों के साथ नेगोशिएशन भी कर सकती है.
