विश्व हिंदी दिवस पर जानें- हिंदी भाषा का महत्व, आज इतने देशो में बोली जाती है हिंदी

विश्व हिंदी दिवस पर जानें- हिंदी भाषा का महत्व, आज इतने देशो में बोली जाती है हिंदी

आज 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका अर्थ यह है कि आज हिंदी भारत ही नहीं अपितु पाकिस्तान, श्रीलंका,मालदीव, सिंगापुर, थाईलैंड, चीन, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, यमन, युगांडा, कनाडा और फिजी जैसे देश के लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हिंदी विश्‍व में चौथी ऐसी भाषा है जिसे सबसे ज्‍यादा लोग बोलते हैं। वर्तमान में भारत में 43.63 फीसदी लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। वहीं पूरे विश्व की बात करें तो दुनिया में तकरीबन 80 करोड़ लोग ऐसे हैं जो इसे बोल या समझ सकते हैं। आज जहाँ हिंदी भाषा का अस्तित्व विश्व में बड़ता जा रहा है। वहीँ भारत में हिंदी भाषा की जगह अंग्रेजी भाषा को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज जिन लोगो को अंग्रेजी नहीं आती उन्हें अनपढ़ समझा जाता है।

हिंदी भाषा का महत्व

हमारा देश विविध भाषाओं वाला देश है। हर प्रांत की अपनी एक बोली है महत्व है, फिर भी हिंदी एक ऐसी भाषा है जो सभी जगह आपसी संवाद के लिए सुगम्य है और अधिकांश लोगों द्वारा बोली जाती है। समस्त भारत में आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक संपर्क के माध्यम के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। सुमित्रानंदन पंत ने कहा था कि “हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिसके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है।”

10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस

हर साल में विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन भारत में 14 सितंबर को होता है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस भारत में हिंदी को आधिकारिक दर्जा प्राप्त होने की खुशी में मनाया जाता है तो वहीं विश्व हिंदी दिवस दुनिया में हिंदी को वही दर्जा दिलाने के प्रयास में मनाया जाता है। पहला हिंदी दिवस नागपुर में 10 जनवरी 1974 में मनाया गया था।

यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का था, जिसमें 30 देश के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। आजादी के बाद हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए कई बहसें हुईं। अहिंदी भाषी राज्य हिंदी को राजभाषा मानने के पक्ष में नहीं थे। दक्षिणी राज्य के लोग इसे अपने साथ अन्याय मान रहे थे इसलिए हिंदी भाषा राज्यों का विरोध देखते हुए संविधान निर्माता ने हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया और इस तरह 1953 को राजभाषा प्रचार समिति वर्धा ने 14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस मनाने का प्रस्ताव दिया।

हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, फिर भी पूरा विश्व जानता है हिंदी भाषा

हालांकि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा हासिल नहीं है। राजभाषा और राष्ट्रभाषा का अंतर लोग जल्दी से समझ नहीं पाते हैं। पहला अंतर इन्हें बोलने वाली संख्या से और दूसरा अंतर इनके प्रयोग करने का है। राष्ट्रभाषा जनसाधारण की भाषा होती है और राजभाषा सरकारी कार्यालय और सरकारी कर्मियों के द्वारा उपयोग में लाई जाती है। कुछ देशों में राजभाषा और राष्ट्रभाषा एक ही है लेकिन बहुभाषी देश में राजभाषा राष्ट्रभाषा अलग-अलग होती है।

राष्ट्रभाषा किसी देश को एक करने के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1917 में गुजरात के भरूच में हुए गुजरात शैक्षिक सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की वकालत की थी। उनके अनुसार भारतीय भाषाओं में केवल हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसे राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया जा सकता है। क्योंकि यह अधिकांश भारतीयों द्वारा बोली जाती है।

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