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हिमाचल में हवा की क्वालिटी खराब, चार शहरों की वातावरण दूषित 

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अबतक दूषित शहरों में दिल्ली जैसे शहरों का नाम आता था। लेकिन लेकिन अब पहाड़ो का भी वातावरण अछूता नहीं रहा।पड़ोसी राज्यों की खराब हवा का असर प्रदेश पर भी दिखने लगा है। पराली जलाने, धूल उड़ने व दूसरे कारणों से हिमाचल का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब हो रहा है। प्रदेश के प्रवेश द्वार परवाणू में इस साल AQI-100 माइक्रो ग्राम पार नहीं गया, लेकिन आज परवाणू AQI लेवल 137 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया है।

इसी तरह बद्दी, कालाअंब और पांवटा साहिब का AQI भी 100 माइक्रो ग्राम हो गया है। बद्दी का AQI 168 माइक्रो ग्राम, कालाअंब का 116 और पांवटा साहिब का AQI 113 हो गया है। इसके बिगड़ने का एक और कारण लंबे समय से बारिश नहीं होना भी है। इस वजह से कच्ची सड़कों की धूल हवा की गुणवत्ता को निरंतर बिगाड़ रही है।

इससे सांस के रोगियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि 100 माइक्रो ग्राम से अधिक का AQI अच्छा नहीं माना जाता है। कार्बन क्रेडिट स्टेट हिमाचल में हवा की गुणवत्ता बिगड़ना अच्छा संकेत नहीं है।

अन्य शहरों में नियंत्रण में AQI
नालागढ़ का AQI-71 माइक्रो ग्राम, बरोटीवाला का 78, डमटाल का AQI-51, ऊना का 72 माइक्रो ग्राम, धर्मशाला का 50, शिमला का 41 और सुंदरनगर का 50 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड किया गया।

हवा में मौजूद जहरीले कणों को मापने का ज़रिया AQI
AQI हवा में मौजूद जहरीले कणों को मापने का जरिया है। इसके 100 माइक्रो ग्राम से अधिक होने से इंसान के फेफड़ों पर दुष्प्रभाव पड़ने लगता है। वायुमंडल में घुलने वाली जहरीली हवाएं सांस के साथ गले, श्वास नली और फेफड़ों तक पहुंच सकती हैं। इससे खासकर अस्थमा व श्वास रोगों की शुरुआत होने का भय रहता है। धूल के कारण चर्म रोग और आंखों में जलन भी होती है।

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