क्या खत्म हो जाएंगी हजारों सरकारी नौकरियां? सरकार का बड़ा फैसला

क्या खत्म हो जाएंगी हजारों सरकारी नौकरियां? सरकार का बड़ा फैसला

Will thousands of government jobs be abolished? Government’s big decision

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हिमाचल प्रदेश में खाली पदों का मुद्दा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने

बड़े फैसले पर हंगामा:

  • हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद घमासान छिड़ गया है।
  • फाइनेंस सेक्रेटरी के आदेशों के बाद कांग्रेस सरकार सोशल मीडिया में बुरी तरह घिर गई है।

मुख्यमंत्री का बचाव:

  • मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ऐसे पद समाप्त किए जा रहे हैं जिनकी अब कोई जरूरत नहीं है।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्त विभाग ने यह जानने के लिए विभागों से पूछा है कि किन पदों की आवश्यकता है, और नए पद अगले वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में क्रिएट किए जाएंगे।

आंदोलन की चेतावनी:

  • बेरोजगारों ने दिवाली के बाद सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है, और प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बालकृष्ण ने आंदोलन का ऐलान किया है।
  • बेरोजगारों का कहना है कि पहले से ही भर्तियां बंद हैं, और पदों को खत्म करना गलत है।

सीएम का ऐतिहासिक संदर्भ:

  • सुक्खू ने बताया कि पूर्व भाजपा सरकारों में भी ऐसे आदेश जारी होते रहे हैं, जैसे कि 2012 में धूमल सरकार के समय।
  • उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस दौरान 19,103 पद भरे जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतज़ार:

  • पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने जारी किए नए आदेश:

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए, पिछले 2 साल से राज्य के विभिन्न विभागों और बोर्ड-निगमों (Boards-Corporations) में खाली चल रहे पदों को समाप्त करने का आदेश जारी किया है। प्रिंसिपल सेक्रेटरी फाइनेंस, देवेश कुमार (Principal Secretary Finance, Devesh Kumar) ने सभी संबंधित विभागों को यह आदेश भेजा है। इस फैसले के तहत स्थाई और अस्थाई दोनों प्रकार के खाली पद समाप्त कर दिए गए हैं।

सभी विभागों को Formal notification issued करने का निर्देश:

वित्त सचिव (Finance Secretary) ने सभी विभागाध्यक्षों को आदेश दिया है कि वे इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करें और इसकी जानकारी वित्त विभाग को दें। संबंधित विभागों को एक हफ्ते के भीतर इन खाली पदों को बजट बुक से हटाने का निर्देश दिया गया है।

पुराने आदेशों की अनदेखी:

जारी आदेशों में 14 अगस्त 2012 के एक पुराने आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें पहले भी ऐसे पदों को समाप्त करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन, पूर्व में इन आदेशों का पालन नहीं किया गया था। इस बार देवेश कुमार ने स्पष्ट कहा है कि सभी विभाग इसे गंभीरता से लें और कोई भी बहाना न बनाया जाए। पद समाप्त करने के बारे में किसी भी प्रकार का प्रस्ताव वित्त विभाग को न भेजा जाए।

8 लाख बेरोजगारों के लिए बुरा समाचार:

सरकार के इस निर्णय को राज्य के 8 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो कई वर्षों से सरकारी परीक्षाओं (Government Exams) की तैयारी कर रहे हैं।

प्रदेश में 65 हजार से अधिक पद खाली:

हिमाचल के विभिन्न विभागों, बोर्ड और निगमों में 65 हजार से ज्यादा पद खाली थे। नए आदेश के अनुसार, जो पद 2 साल से खाली पड़े हैं, उन्हें समाप्त कर दिया गया है। इससे अनुमान है कि करीब 15 से 20 हजार पद खत्म हो जाएंगे, जिससे सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की संख्या घटेगी।

भर्तियों की कमी और आयोग की स्थिति:

मौजूदा सरकार को सत्ता में आए करीब 22 महीने हो गए हैं, लेकिन इस अवधि में राज्य में नई भर्तियां नाम मात्र ही हुई हैं। Staff Selection Commission को भंग कर दिया गया था और नया राज्य चयन आयोग अब तक पूरी तरह से फंक्शनल नहीं हो पाया है। इस वजह से, अधिकारियों और कर्मचारियों के रिटायर होने से जो पद खाली हुए थे, उन्हें अब समाप्त करने की बात कही जा रही है। नई भर्तियां न होने के कारण बड़ी संख्या में पद भविष्य में भी खाली हो सकते हैं।

हिमाचल सरकार ने खाली पदों को खत्म करने का लिया निर्णय

  • सरकारी आदेश:
    हिमाचल सरकार ने विभिन्न विभागों और बोर्ड-निगमों में पिछले 2 साल से खाली चल रहे पदों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रिंसिपल सेक्रेटरी फाइनेंस देवेश कुमार द्वारा आदेश जारी किए गए हैं।
  • स्थाई और अस्थाई पद समाप्त:
    नए आदेशों के तहत सभी स्थाई और अस्थाई खाली पद खत्म कर दिए गए हैं। सभी विभागाध्यक्षों को औपचारिक अधिसूचना जारी करने और इस बारे में वित्त विभाग को जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।
  • बजट बुक से हटाने के निर्देश:
    विभागों से कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर इन पदों को बजट बुक से हटा दिया जाए। इसके अलावा, वित्त सचिव ने स्पष्ट किया है कि पद समाप्त करने में किसी भी तरह की बहानेबाजी न की जाए और न ही इससे जुड़ा कोई प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाए।
  • 2012 के आदेश का हवाला:
    जारी आदेशों में 14 अगस्त 2012 के एक आदेश का उल्लेख किया गया है, जिसमें पहले भी ऐसे पदों को समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे, परंतु उनकी अनुपालना नहीं हुई।
  • 8 लाख बेरोजगारों को झटका:
    यह निर्णय राज्य के उन 8 लाख से अधिक बेरोजगारों के लिए बड़ा झटका है, जो कई वर्षों से सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
  • 65 हजार से ज्यादा पद खाली:
    राज्य के विभिन्न विभागों, बोर्ड और निगमों में 65 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े थे। नए आदेशों के अनुसार, पिछले 2 साल से खाली पड़े लगभग 15 से 20 हजार पद समाप्त कर दिए गए हैं।
  • नई भर्तियों की कमी:
    राज्य में मौजूदा सरकार के 22 महीने पूरे होने के बाद भी नई भर्तियां नहीं हो पाई हैं, क्योंकि स्टाफ सिलेक्शन कमीशन भंग कर दिया गया और नया राज्य चयन आयोग भी अभी पूरी तरह फंक्शनल नहीं हो पाया है।

निष्कर्ष:

राज्य सरकार का यह निर्णय एक तरफ वित्तीय दृष्टि से जरूरी माना जा सकता है, लेकिन इससे युवाओं की उम्मीदों पर गहरा असर पड़ा है। क्या यह कदम प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ाएगा या सरकारी क्षेत्र की कार्यकुशलता में सुधार लाएगा, यह देखना अभी बाकी है।

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