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पार्वती नदी की प्राकृतिक सुंदरता आगतुंको को खूब भाने लगी है.

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पार्वती नदी की प्राकृतिक सुंदरता आगतुंको को खूब भाने लगी है.

पार्वती घाटी की पार्वती नदी के बायीं ओर बसा काल्गा पहले एक चारागाह होती थी। धीरे-धीरे यहां के आस-पास के बरशैणी, पुल्गा और तुल्गा गांव के लोगों ने पशुशालाएं बनाई। जो राजस्व रिकार्ड में भी अंकित है। यहां की ज़मीन भी इन्हीं गांव के निवासियों की है।

परिवार बढ़ते गए तो बरशैणी, पुल्गा और तुल्गा गांव के कुछ परिवारों ने यहां घर बनाए और यहीं रहने लगे।

कालचक्र के साथ पार्वती घाटी में पर्यटन व्यवसाय बढ़ा। यहां की आवोहवा और प्राकृतिक सुंदरता आगतुंको को खूब भाने लगी। यहां पहले छोटे और फिर बड़े-बड़े होटल बने। गांव की तलहटी में पार्वती जल विद्युत परियोजना के बांध से बनी झील गांव की सुंदरता में चार चांद लगाती है.

लेकिन गांव के नीचे बनी परियोजना की टनल गांव की नींव के लिए बड़ा खतरा भी है।

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