हिमाचल में कालका-शिमला फोरलेन एक बार फिर से कुमारहट्टी में धंस रहा है। दरअसल कुमारहट्टी फ्लाईओवर में बड़ी बड़ी दरारें आ गई हैं। इससे एक लेन की जमीन लगातार बैठ रही है। फोरलेन के नीचे मिट्टी के दबाव रोकने को लगाई गईं प्लेटें बाहर निकल रही है। जिससे यहां कभी भी बड़ा हा*दसा पेश आ सकता है।
वहीँ फोरलेन निर्माता कंपनी ने शिमला से कालका की ओर जाने वाली एक लेन को वाहनों के लिए बंद कर दिया है। फ्लाई ओवर के एक हिस्से में बैरिकेड्स लगाए गए हैं। लेकिन अब सवाल फ्लाई ओवर निर्माण में इसकी गुणवत्ता को लेकर उठ रहे हैं।
पर्यटन सीजन पीक पर
आपदा के बाद अब प्रदेश में पर्यटन सीजन पीक पर है। अगले तीन महीने तक पहाड़ों पर हजारों लोग बर्फ देखने की चाहत में पहुंचते हैं। ऐसे में फ्लाईओवर को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले विंटर टूरिस्ट सीजन पर इसकी मार पड़ सकती है। इससे पर्यटकों की आवाजाही बाधित हो सकती है। हालांकि अभी एक लेन को छोड़कर हाईवे पर यातायात चल रहा है।
कालका से शिमला फोरलेन को बनते हुए छह साल से ज्यादा वक्त हो गया है। इसका निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों में रहा है। अनेकों बार सड़क धंस चुकी है। सड़क धंसने से कई बार दर्दनाक हादसे भी हो गए हैं। चक्कीमोड़, सोलन, चंबाघाट, कुमारहट्टी, सनवारा टोल प्लाजा, जाबली इत्यादि स्थानों पर कई बार सड़क टूट चुकी है।
फोरलेन के निर्माण को लेकर सवाल खड़े
पहाड़ कई बार हाईवे पर गिरे है। यही वजह रही कि हाईकोर्ट भी इस फोरलेन के निर्माण को लेकर सवाल खड़े कर चुका है। इस फोरलेन का निर्माण कार्य लंबे समय तक कोर्ट की निगरानी में किया गया। शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने भी निम्न क्वालिटी के काम को लेकर FIR कर रखी है।
बिना बारिश के धंस रहा फ्लाई ओवर
प्रदेश में सितंबर महीने के बाद से सूखा पड़ा हुआ है। इन तीन महीनों में नाममात्र बारिश हुई है। बिना बारिश के फोरलेन का धंसना निर्माण कार्य पर सवाल खड़े कर रहा है। इससे पहले चक्कीमोड़ के पास बीती बरसात में सड़क ढह गई थी। उस दौरान न केवल हिमाचल बल्कि चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के लोगों को भी इस फोरलेन की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
