हिमाचल प्रदेश में लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 साल करने का विधेयक विधानसभा में पारित हो गया है। मानसून सत्र में मंगलवार को सोशल जस्टिस मिनिस्टर धनीराम शांडिल ने बाल विवाह प्रतिषेध प्रस्तुत किया। इसे बिना चर्चा के सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। अब इस बिल को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा जाएगा। प्रदेश में अब तक लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है। राज्य सरकार इसमें 3 साल का इजाफा कर रही है। इसके संशोधित ड्राफ्ट को राज्य मंत्रिमंडल ने 7 महीने पहले ही मंजूरी दे दी थी। आज सदन में संशोधन विधेयक पास हो गया। इससे पहले केंद्र सरकार ने भी संसद में बिल पेश किया था, लेकिन विरोध के चलते अब तक लागू नहीं हो पाया।
सोशल जस्टिस मिनिस्टर धनीराम शांडिल ने बताया कि शादी की उम्र बढ़ने से लड़कियों को जीवन में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। अभी कुछ लोग लड़कियों की छोटी उम्र में शादी कर देते हैं। इससे बच्चियां पढ़ाई नहीं कर पाती और करियर में भी आगे नहीं बढ़ पाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि शादी की उम्र बढ़ाकर उन्हें कुपोषण से बचाया जाए, क्योंकि जल्दी शादी के कारण मां बनने से उनके स्वास्थ्य पर कई बार बुरा असर पड़ता है।
केंद्र सरकार भी लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का निर्णय ले चुकी है। लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 साल करने के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट ने दिसंबर 2020 में मंजूरी दी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को लाल किले की प्राचीर से प्रस्ताव की घोषणा करते हुए इसकी जानकारी दी थी।PM मोदी ने महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र बढ़ाने के फैसले को लड़कियों को कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी बताया था।
