यह राजधानी शिमला है मेरी जान

राजधानी शिमला नाम तो सुना ही होगा, यह वही राजधानी शिमला है जिसकी खूबसूरती की एक वक़्त पर मिसाल दी जाती थी फिल्म जगत से लेकर कवियों की कविताओं तक शिमला का ज़िक्र देखा जा सकता है लेकिन जैसे जैसे वक़्त बीता पहाड़ो की रानी अपना प्रभुत्व खोने लगी है राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने की कोशिशें भी जारी हैं लेकिन पहाड़ो की रानी में नज़ारे फीके होने लगे हैं इसके लिए बहुत से कारण जिम्मेदार है, कारणों पर बात शुरू हुई ही है तो चलिए पहले एक बार राजधानी शिमला की सुंदरता को नुकसान पहुँचाने वालो की इन वजहों को ही जान लेते हैं

  1. अवैध डंपिंग

राजधानी शिमला की सड़कों पर अवैध डंपिंग का खेल चल रहा है | शहर में अवैध  डंपिंग करने वाला माफिया सक्रिय है और विभाग आंखें मूंदे बैठा हुआ है | रोजाना यह माफिया टनों के हिसाब से बीच सड़क पर इलीगल डंपिंग कर गायब हो जाते हैं | शहर में की जा रही यह इलीगल डंपिंग वनों को भी नष्ट करने का काम कर रही है | इस  डंपिंग की वजह से जंगल में रहने वाली छोटी प्रजाति खत्म हो जाती हैं | कुछ माफिया डंपिंग जंगलों में न कर बीच सड़क पर ही कर देते हैं | जिससे सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है | सड़क किनारे लगे मिट्टी के ढेर से बड़ा हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है | बाइक चलाने वाले लोगों के लिए यह खतरा कई गुना अधिक होता है | इन दिनों शहर भर में इलीगल डंपिंग के बाद लगे मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर सड़क किनारे साफ तौर पर देखे जा सकते हैं | फिलहाल जिम्मेदार विभाग केवल आंखें मूंदकर तमाशा देख रहा है | मुख्य सड़क पर डंपिंग रोकने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है | जबकि जंगलों में डंपिंग रोकना वन विभाग के कर्तव्य क्षेत्र में आता है | दोनों ही विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल सचिवालय के दर्शनों में मशगूल हैं |

2.  स्मार्ट सिटी बनने में देरी

क्यूंकि राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी बनाया गया है ऐसे में स्मार्ट सिटी शिमला में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई हैं | कई जगहों पर कूड़े के पहाड़ देखने को मिल जाते है तो वहीं शहर में कुछ ऐसी भी जगह हैं, जहां सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकतायेँ पूरी की जा रही है | लिहाजा लोगों को इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है | शिमला के पुराना बस स्टैंड, 103 रेन शेल्टर, रिज मैदान से नीचे की ओर भी गंदगी देखने को मिलती है और यह  राजधानी की वह जगहें हैं जहाँ अक्सर लोगों का आना जाना लगा रहता है |

3.  प्राकृतिक जल स्त्रोतों का दूषित होना

आए दिन ऐसी तस्वीरे देखने को मिलती है जिसमें प्रदेश के जल स्रोतों में भी दूषित और ज़हरीले पदार्थ मिला दिए जाते हैं | हाल ही के मामले की बात करें तो नगर निगम शिमला के बड़ागांव सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में बिना ट्रीटमेंट किए गए पानी को नदी में छोड़ा जा रहा है और बड़ागांव नदी का पानी शिमला और सोलन के पेयजल स्त्रोत अश्वनी खड्ड में मिल रहा है। ऐसे में इससे बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पहले भी ऐसी स्थितियाँ कई बार देखने को मिल चुकी है | पानी में गंदगी मिलने से ना सिर्फ मनुष्य के जीवन को खतरा है बल्कि इससे पेड़ पौधों और जानवरों को भी खतरा है क्यूंकि जहाँ जहाँ दूषित पानी जाएगा वहां वहां नुकसान पहुंचाएगा।

4. जंगलों में अवैध कटान, डंपिंग और खनन

यूँ तो प्रशासन आये दिन इस बात का दावा करता है कि जंगलों में अवैध कटान रोकने, खनन रोकने और कूड़ा-कचरा फैलाने के खिलाफ कदम उठाये जा रहे हैं लेकिन फिर भी समय समय पर खबरें सामने आ ही जाती हैं, प्रदेश में खनन माफिया इतना सक्रिय है कि लाखों जुर्माना वसूले जाने के बाद भी खनन पर रोक नहीं लग पाई है | जंगलों में कचरा फेंकने के मामलों में भी कटौती होती नज़र नहीं आती | अवैध कटान के कारण तो अब प्रदेश के जंगल पेड़ों को टीआरएस गए हैं |

इसी  के साथ  बढ़ते प्रदूषण और सफाई को लेकर हो रहे कुप्रबंधन के कारण अब धीरे-धीरे राजधानी के मौसम में भी परिवर्तन आने लगा है | साल 2022-23 में मौसम का मिजाज़ इसका एक उदाहरण रहा है | सैलानी बर्फबारी का इंतज़ार करते रहे लेकिन सिर्फ निराशा ही हाथ लगी | मौसम में बदलाव न सिर्फ सैलानियों के लिए निराशाजनक है बल्कि सूबे के किसान,  बागवान हो या फिर प्राकृतिक जल स्त्रोत सभी के लिए नुकसानदेय है क्यूंकि न सिर्फ मौसम के बदलाव ने फसलों को खराब किया, बल्कि इस बार राजधानी में गर्मी से पहले ही सूखे के हालत बनने शुरू हो गए हैं |

आने वाले समय में राजधानी की खूबसूरती को संरक्षित करने के लिए उचित कदम उठाना आवशयक रहेगा।

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