जिला बिलासपुर के क्षेत्रीय हॉस्पिटल बिलासपुर में मरीजों और उनके तीमारदारो को गंदा पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है | हॉस्पिटल की लापरवाही इस कदर है कि ट्रामा सेंटर की इमारत पर लगी पानी की टंकियों में अक्सर बंदर पानी पीते नजर आते हैं | इधर उधर घूमने वाले गंदगी में हाथ डालने वाले यह बंदर हॉस्पिटल की टंकियों में जब पानी पीते हैं तो देखने वाले स्थानीय लोग एवं मरीजों के तीमारदारों को काफी ठेस पहुंचती है और उन्हें अपने और अपनी मरीज की स्वास्थ्य की चिंता सताने लगती है | मरीज और तीमारदार अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सोचने को विवश हैं कि वह यहां पर इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं या फिर बीमारी को बढ़ाने के लिए, क्योंकि क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर के परिसर में स्थित ट्रामा सेंटर के छत पर रखी पानी की टंकी में बंदर पानी पी रहे हैं।
यूं तो अस्पताल प्रशासन सफाई व्यवस्था को दुरूस्त रखने के दावे करता है, लेकिन इन बंदरों की करतूतों ने अस्पताल के प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है। मरीजों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पानी की टंकी के ऊपर ढक्कन न होने के कारण बंदर बिना किसी रोक टोक के इस पानी को पी रहे हैं। ऐसे में जो मरीज अपना इलाज करवाने के लिए यहां पहुंचते हैं वह भी इस पानी को पी सकते हैं। क्षेत्रीय अस्पताल हाेने के चलते यहां पर पूरे जिला की चारों विधानसभा क्षेत्र के लोग अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर पैदा हालातों को देखते हुए मरीज चिंतित है कि उनका इलाज होगा या वह और किसी अन्य बीमारी के शिकार हो जाएंगे। हैरानी की बात है कि क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में चारों ओर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है, लेकिन इस और अस्पताल प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। वहीं एमएस क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर ने भी इस मामले को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की है। ऐसे में सवाल है कि इस तरह की लापरवाही का जिम्मेवार कौन है। पहले भी अस्पताल में बेसहारा पशु पहुंच गए थे जिसे सुरक्षा कर्मियों ने बाहर खदेड़ा था। हालांकि लोगों की सुविधा को दरकिनार करते हुए अस्पताल प्रशासन ने वाहनों को अंदर आने पर रोक लगा दी है, लेकिन वहीं दूसरी ओर जानवर बेरोकटोक अपना करतब दिखा रहे हैं। वहीं इस बारे में एम एस संजीव वर्मा का कहना है कि मामला उनके ध्यान में नही है। यदि ऐसा है तो वह शीघ्र ही इसका समाधान कर देंगे।
