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शिमला में बुक कैफ़े फिर खुला

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शिमला के टक्का बेंच स्थित पहले बुक कैफ़े के कपाट एक बार फिर स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए खुल गए हैं।कोरोना काल के समय से बन्द पड़े शिमला बुक कैफ़े में फिर से लोग पढ़ने के साथ व्यंजनों का आनंद ले सकते है।2017 में बना यह बुक कैफ़े पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को खूब बहाता था।यहां पर साहित्यकारों द्वार संगोष्ठियों का आयोजन भी किया जाता था,लेकिन कोरोना काल के कारण यहां पर सभी गतिविधियां बन्द हो गयी थी।2017 में बने उस बुक कैफ़े को शुरुआत में कैदियों द्वारा चलाया जाता था बाद ने नगर निगम ने इसे निजी हाथों में सौंप दिया और कोरोना काल मे निजी कम्पनी भी इसे छकाने में असमर्थ रही।दो वर्षों से इस पर ताला लटका था।अब एक बार फिर लोग यहां चाय ,कॉफी की चुस्कियों के साथ पढ़ने जा आनंद ले सकते है।
शिमला बुक कैफ़े में कार्य कर रहे मनीष कुमार और अमित ठाकुर ने कहा कि अभी दो दिन पहले ही इसे खोला गया है।लोगों को अभी पता भी नही चला है कि कैफ़े आरम्भ हो गया है इसलिए शुरुआत में केवल कम ही व्यंजन बनाये जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि चाय, कॉफी, चायनीज,कॉन्टिनेंटल परोस रहे है।मॉकटेल उनके कैफ़े की विशेषता है।उन्होंने कहा कि अभी कम लोग ही यहां आ रहे हैं धीरे धीरे जैसे लोगों की आमद बढ़ेगी तो वह पहाड़ी व्यंजन भी पर्यटकों को परोसेंगे।
बता दें 2017 में नगर निगम शिमला में टका बेंच पर बुक कैफे बनाया गया था और इस कैफे को कैदियों को चलाने के लिए दिया गया था, जिससे यह एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ था. यहां पर पर्यटक और स्थानीय लोग काफी तादाद में आते थे, बात की जाए तो यह साहित्यकारों की पहली पसंद था लेकिन नगर निगम ने इस कैफे का निजीकरण कर दिया और कंपनी को इस कैफे को चलाने के लिए दे दिया.कोरोना काल के कारण निजी कम्पनी इसे चलाने में असमर्थ रही।अब एक बार फिर यहां लोग इस कैफ़े जा आनंद ले सकते है।

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