कांगड़ा जिले में चौंकाने वाली चिट्टा तस्करी की कहानी ,एक पूरा परिवार नशे के कारोबार में लिप्त

कांगड़ा जिले में चौंकाने वाली चिट्टा तस्करी की कहानी ,एक पूरा परिवार नशे के कारोबार में लिप्त

The whole family got involved in the drug business, an entire family got involved in the drug business

KANGRA: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा Kangra जिले के नुरपूर Nurpur इलाके में एक परिवार family के चि*ट्टा तस्करी chitta smuggling में संलिप्त होने का खुलासा हुआ है, जो न केवल पुलिस police के लिए बल्कि पूरे समाज socitey के लिए एक बड़े झटके जैसा है। इस परिवार का हर सदस्य मादक पदार्थों के तस्करी में शामिल था—पिता, पुत्र, बहू, पत्नी और यहां तक कि उनकी बेटियां भी।

कैसे खुला पूरा मामला?

यह घटना 30 मई 2017 की है, जब कांगड़ा kangra जिले के इंदौरा Indora थाने की पुलिस ने दलबीरो देवी के घर पर छापा मारा। इस छापे में पुलिस को 6.5 ग्राम हेरोइन और ₹3,500 नकद बरामद हुए थे। इसके बाद दलबीरो देवी को गिरफ्तार कर लिया गया और अब कोर्ट ने उसे चिट्टा तस्करी में 10 साल की सजा और ₹1,00,000 जुर्माना सुनाया है।

सिर्फ दलबीरो नहीं, पूरा परिवार था शामिल

जांच में सामने आया कि दलबीरो देवी का पूरा परिवार नशे के कारोबार में संलिप्त था। उसके बेटे मिथुन पर पठानकोट (पंजाब) और हिमाचल प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के 14 मामले दर्ज हैं। इसी तरह, उसके पति अजय पर अफीम और चिट्टे के तस्करी का मामला इंदौरा में दर्ज है। यही नहीं, दलबीरो की बहू आशा पर भी एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज है। उनके दो बेटियां—नंदिनी और घारे, और बेटा गोविंद भी ड्रग्स तस्करी में शामिल थे।

छन्नी गांव की बदनामी

यह पूरी घटना हिमाचल प्रदेश के इंदौरा स्थित छन्नी गांव की है, जो पिछले कुछ वर्षों से नशे के कारोबार के लिए बदनाम हो चुका है। यहां कई बार चिट्टे के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे यह गांव नशे के काले धंधे का गढ़ बन चुका है।

हिमाचल पुलिस की सख्त कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, और नशे के खिलाफ अपनी कड़ी कार्रवाई को जारी रखा है। नूरपुर पुलिस ने यह चौथी बड़ी सजा दिलवाकर यह साबित कर दिया कि पुलिस इस तरह के मामलों में कोई समझौता नहीं करती।

समाज को नशे से मुक्त करने का अभियान

हिमाचल प्रदेश पुलिस का अभियान जारी रहेगा, ताकि राज्य को नशा मुक्त बनाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि चिट्टा तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई समाज में चेतना फैलाएगी और लोगों को इस खतरनाक धंधे के बारे में जागरूक करेगी।

ड्रग्स के काले धंधे को उजागर करती

यह पूरी कहानी न केवल ड्रग्स के काले धंधे को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक परिवार इस घातक नशे की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। पुलिस की इस कड़ी कार्रवाई से यह संदेश भी मिलता है कि नशे के खिलाफ हिमाचल प्रदेश में कोई समझौता नहीं किया जाएगा. कांग्रेस, भाजपा, और अन्य दलों के साथ-साथ आम जनता को भी इस मामले से सीख लेने की जरूरत है। अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो अपने समाज को इस खतरनाक बीमारी से बचा सकते हैं।

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