Preparations to save Himachal Bhawan from attachment
प्रदेश सरकार ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन (Himachal Bhawan in Delhi) को कुर्की से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सेली हाइड्रो पावर कंपनी को 64 करोड़ रुपए (64 crores to Seli Hydro Power Company) की अग्रिम राशि लौटाने के लिए सरकार आज हाईकोर्ट में भुगतान करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने 44 करोड़ और 20 करोड़ रुपए के दो ड्राफ्ट (Two drafts of Rs 44 crore and Rs 20 crore) तैयार किए हैं, जिन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाएगा। यह निर्णय हाईकोर्ट के 18 नवंबर को दिए गए उस आदेश के बाद लिया गया, जिसमें सेली कंपनी की याचिका पर हिमाचल भवन की संपत्ति अटैच करने का निर्देश दिया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
सेली हाइड्रो पावर कंपनी को लाहौल-स्पीति में 320 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट 2009 (Seli Hydro Power Company was awarded 320 MW power project in Lahaul-Spiti in 2009)में आवंटित किया गया था। इसके लिए कंपनी ने 64 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जमा की थी। परियोजना कई बाधाओं और आपत्तियों के चलते क्रियान्वित नहीं हो सकी। 2017 में कंपनी ने अपनी अग्रिम राशि की वापसी की मांग की। लेकिन सरकार ने राशि जब्त करते हुए करार रद्द कर दिया। मामला आर्बिट्रेशन में गया, जहां फैसला कंपनी के पक्ष में हुआ।
पूर्व सरकार पर आरोप
इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू (Chief Minister Sukhwinder Sukhu) ने कहा कि जयराम सरकार (Jairam Government) ने राज्य की संपत्तियों को लुटाने का प्रयास किया और समय पर उचित अपील नहीं की। उन्होंने ब्रेकल कंपनी (Breckel Company) के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने 280 करोड़ रुपए ब्याज सहित लौटाने की बात कही थी, लेकिन उनकी सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की और राज्य के पक्ष में फैसला सुनिश्चित किया।
राजनीतिक विवाद और आगे की रणनीति
यह प्रकरण न केवल हिमाचल सरकार की प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक विवाद का भी केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू (CM Sukhu) ने कहा है कि उनकी सरकार हिमाचल की संपत्ति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस केस में न्यायिक लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सेली कंपनी के भुगतान के बावजूद सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
भवन कुर्की से बचाने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को कुर्की से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सेली हाइड्रो पावर कंपनी को 64 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि लौटाने के लिए सरकार आज हाईकोर्ट में भुगतान करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने 44 करोड़ और 20 करोड़ रुपए के दो ड्राफ्ट तैयार किए हैं, जिन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाएगा। यह निर्णय हाईकोर्ट के 18 नवंबर को दिए गए उस आदेश के बाद लिया गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
सेली हाइड्रो पावर कंपनी को लाहौल-स्पीति में 320 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट 2009 में आवंटित किया गया था। इसके लिए कंपनी ने 64 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जमा की थी। परियोजना कई बाधाओं और आपत्तियों के चलते क्रियान्वित नहीं हो सकी। 2017 में कंपनी ने अपनी अग्रिम राशि की वापसी की मांग की। लेकिन सरकार ने राशि जब्त करते हुए करार रद्द कर दिया। मामला आर्बिट्रेशन में गया, जहां फैसला कंपनी के पक्ष में हुआ।
