Now patients suffering from sleep disorders can be treated in AIIMS Bilaspur
प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा एम्स में मरीजों के लिए स्लीप लैब शुरू हो गई है। उन्होंने मंगलवार को लैब का उद्घाटन किया था। अनिद्रा, बेचैन पैर सिंड्रोम, नींद में चलने, रात का डर और अन्य विकारों के रोगियों का अब एम्स बिलासपुर में बेहतर इलाज हो सकेगा। लैब में फुल नाइट डायग्नोस्टिक पीएसजी, स्प्लिट नाइट पीएसजी, पीएपी टाइट्रेशन पीएसजी और एमएसएलटी स्टडी (Diagnostic PSG, Split Night PSG, PAP Titration PSG and MSLT Study) जैसी जांच की सुविधा होगी।
स्लीप लैब एक ऐसी सुविधा है, जहां नींद संबंधी विकारों के निदान और उपचार के लिए नींद का अध्ययन किया जाता है। जिसे पॉलीसोमोग्राफी (पीएसजी) (Polysomnography (PSG) भी कहा जाता है। नींद के अध्ययन के दौरान रोगी रात प्रयोगशाला में रहता है, जबकि एक तकनीशियन उसके मस्तिष्क और शरीर की गतिविधि पर नजर रखता है। मस्तिष्क तरंगों, हृदय गति, श्वास, मांसपेशियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए मरीज के शरीर पर छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए मरीज की उंगली या कान पर एक सेंसर भी लगाया जाता है।
खर्राटों, अंगों की गति पर नजर रखता है तकनीशियन
कम रोशनी वाले वीडियो कैमरा, ऑडियो सिस्टम से तकनीशियन को कमरे में हो रही गतिविधियों को देखने और सुनने की सुविधा मिलती है। तकनीशियन रोगी की मस्तिष्क तरंगों,आंखों की गति,हृदय गति,सांस लेने के तरीके,रक्त ऑक्सीजन के स्तर, शरीर की स्थिति, छाती और पेट की गति,अंगों की गति, खर्राटों और अन्य शोर पर नजर रखता है। नींद संबंधी विकार स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अवसाद, मधुमेह, हृदय रोग जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। शुरू में ही इनका निदान और उपचार व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।
ऐसे किया जाता है अध्ययन
स्लीप लैब में रोगी रात को प्रयोगशाला में रहता है, जबकि एक तकनीशियन उसके मस्तिष्क और शरीर की गतिविधि पर नजर रखता है। मस्तिष्क तरंगों, हृदय गति, श्वास, मांसपेशियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए मरीज के शरीर पर छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए मरीज की उंगली या कान पर एक सेंसर भी लगाया जाता है।है और कई युद्धों के नतीजे तय किए हैं। सात दिन नहीं, अब 40 मिनट में धर्मपुर पहुंच रहे सैंपल
स्लीप लैब और उसकी सेवाएं
- स्लीप लैब: एम्स बिलासपुर में नई स्लीप लैब में अनिद्रा, बेचैन पैर सिंड्रोम, नींद में चलने, रात के डर, और अन्य नींद विकारों का इलाज उपलब्ध है।
- जांच सुविधाएं: लैब में फुल नाइट डायग्नोस्टिक पीएसजी, स्प्लिट नाइट पीएसजी, पीएपी टाइट्रेशन पीएसजी, और एमएसएलटी स्टडी जैसी परीक्षण सुविधाएं मौजूद हैं।
- स्लीप अध्ययन प्रक्रिया: मरीज रात में प्रयोगशाला में रहते हैं, और उनके मस्तिष्क तरंगों, हृदय गति, श्वास, रक्त ऑक्सीजन स्तर आदि पर सेंसरों के जरिए निगरानी होती है। तकनीशियन मरीज की मस्तिष्क तरंगों, आंखों की गति, हृदय गति, श्वास, शरीर की स्थिति, अंगों की गति, और खर्राटों पर ध्यान देते हैं।
ड्रोन सुविधा (Drone Facility)
- कल्चर सैंपल परिवहन: पहले सैंपल को जिला अस्पताल से धर्मपुर लैब पहुंचाने में हफ्तों लगते थे, परंतु ड्रोन की सहायता से अब यह मात्र 40 मिनट में संभव है।
- तकनीकी प्रक्रिया: सैंपल को थर्माकोल बॉक्स में आइस पैक के साथ रखा जाता है और ड्रोन द्वारा ले जाया जाता है।
फिजियोलॉजी विभाग लैब
आयुष ब्लॉक की पहली मंजिल पर अन्य विशेषज्ञों के सहयोग से फिजियोलॉजी विभाग लैब (Physiology Department Lab) को संचालित करेगा। इसमें रोगी देखभाल के लिए स्लीप लैब सेवाओं की अत्याधुनिक सुविधा है। हिमाचल और आसपास के राज्यों के मरीज इसका लाभ उठा सकेंगे। भविष्य में स्लीप लैब में इन सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि विभिन्न प्रकार के स्लीप स्टडीज की सुविधा दी जा सके।
एम्स में कल्चर सैंपल ले जाने के लिए ड्रोन सुविधा के बाद मरीजों को ही नहीं, चिकित्सकों को भी राहत मिली है। जिला अस्पताल और एम्स बिलासपुर से जिन सैंपल को सोलन के धर्मपुर लैब पहुंचाने के लिए हफ्ते से 10 दिन का समय लगता था, वह अब 40 मिनट में धर्मपुर पहुंचाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एम्स मेें ड्रोन सुविधा का शुभारंभ किया। हालांकि मंगलवार से बुधवार शाम तक ड्रोन से कोई कल्चर सैंपल धर्मपुर नहीं भेजा गया।
लेकिन एम्स प्रबंधन के अनुसार अंडर ट्रायल पिछले सप्ताह ही ड्रोन से धर्मपुर सैंपल भेजे गए थे। एम्स के पीआरओ डॉक्टर तरुण ने बताया कि एक पायलट एम्स से ड्रोन उड़ाता है, वहीं दूसरा व्यक्ति धर्मपुर पोस्ट ऑफिस के पास सैंपल उतारने और उन्हें धर्मपुर लैब पहुंचा रहा है। इन सैंपल को सामान्य तौर पर कोल्ड चेन में भेजा जाता है। लेकिन ड्रोन की कैपेसिटी पांच किलो की है तो उसमें कोल्ड चेन में सैंपल भेजना संभव नहीं है। इसलिए थर्माकोल का बॉक्स बनाकर उसमें आइस पैक रखकर उसके अंदर इन सैंपल पैक कर भेज रहा है।
सुविधा
तकनीशियन रोगी की मस्तिष्क तरंगों,आंखों की गति,हृदय गति,सांस लेने के तरीके,रक्त ऑक्सीजन के स्तर, शरीर की स्थिति, छाती और पेट की गति,अंगों की गति, खर्राटों और अन्य शोर पर नजर रखता है। नींद संबंधी विकार स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अवसाद, मधुमेह, हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता हैं। शुरू में ही इनका निदान और उपचार व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।
