केंद्रीय बजट में हिमाचल के हितों की अनदेखी हुई। बजट में हिमाचल में हुई आपदा में पुनर्वास के सहायता की बात हुई है, लेकिन इसमें भेदभाव किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय बजट से हिमाचल को बड़ी अपेक्षाएं थी, लेकिन मिला कुछ भी नहीं। आपदा राहत और पुनर्वास के लिए केंद्रीय बजट में हिमाचल, सिक्किम और उत्तराखंड जिक्र गया है। उत्तराखंड और सिक्किम के लिए असिस्टेंस शब्द का इस्तेमाल हुआ है जबकि हिमाचल के मल्टी लेटरल डेवलेपमेंट सिस्टम शब्द का इस्तेमाल किया गया है यानी हिमाचल को अलग से कुछ भी नहीं है।
वहीँ तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने केंदीय बजट को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि हिमाचल की केंद्र के बजट से उम्मीदें थी, लेकिन केंद्र ने बजट में झुनझुना ही थमाया है। बजट में केवल बैसाखियों पर चल रही केंद्र की सरकार को बचाने के लिए सहयोगी दलों के राज्यो की सरकारों को ही बजट दिया है जबकि हिमाचल की अनदेखी की गई। जबकि हिमाचल प्रदेश को केंद्र के बजट से काफी उम्मीदें थी खासकर आपदा के दौरान हिमाचल प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है और आपदा राहत के लिए विशेष पैकेज कैसे बजट से उम्मीदें थी इसके अलावा भानु पाली बिलासपुर रेलवे लाइन के लिए बजट में भी कोई प्रावधान नही।
वही कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए भी प्रदेश सरकार पर ही वित्तिय बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में हिमाचल से मंत्री जगत प्रकाश नड्डा है वह भी हिमाचल को कुछ खास नहीं दिल पाया है। मैंने कहा कि हिमाचल के हिस्से का बजट अपनी सहयोगी दलों के राज्यों की सरकारों को दिया जा रहा है जो की काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।
