कालका – शिमला फोरलेन हाईवे पर बारिश के मौसम में पथरों के गिरने का सिलसिला जारी है । इस दौरान बारिश के होने पर जब पहाड़ से पत्थर गिरते है तो ट्रेफिक को कुछ समय के लिए रोका जा रहा है। बता दें कि एनएचएआई ( भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ) की और से चकीमोड़ मे पहाड़ से आ रहे मलवे व पत्थर को रोकने के लिए पांच मीटर ऊँचा कंक्रीट का डंगा स्टेपस मे लगाया गया है , लेकिन पहाड़ से जिस रफ़्तार से पत्थर सड़क की और आते है वह डंगे से क्रोस होकर सड़क पर गिरते है, जिससे कभी भी कोई नुक्सान हो सकता है।
पहाड़ से पत्थर गिरते समय वाहन चालकों को खुद भी सतर्क रहने की हिदायत दी जाती है . हालांकि पहाड़ से पत्थर आने का खतरा अब कुछ ही स्थानों पर रह गया है, जिसमे धर्मपुर से सुक्कीजोहडी ,सनवारा ,चक्कीमोड से टीटीआर तक अभी भी बारिश के मौसम मे पहाड़ों से पत्थर आने की आशंका रहती है।
ग्रील कम्पनी की और से बार-बार बारिश के मौसम मे पहाड़ को देखकर चलने की अपील की जा रही है. प्रदेश के सेवानिवृत इंजीनियरो का मानना है कि चक्कीमोड में पांच मीटर का स्टेपस मे कंक्रीट के डंगे से कोई लाभ नही है, जिस स्थान पर डंगा लगाया गया है उस पहाड की ऊचाई मौके पर लगाए गए डंगे से कही ज्यादा है जिसकेे कारण भारी बारिश मे अभी भी पहाड से पत्थर तेजी से आकर गिरते है . जिससे कई बार सडक को अस्थाई रूप से वाहनो की आवाजाही बंद करनी पड़ती है .
चक्कीमोड के पहाड़ पर सनवारा में टोलप्लाजा के पहाड़ पर लगाया गया जाल या टीटीआर की तर्ज पर लोहे का जाल व ग्रीन शीट कामयाब हो सकती है . हालाँकि ग्रील कम्पनी की पुरी नजरें दिन रात हाईवे पर लगी हुई है, जिसमे कर्मचारी व मशीनरी दोनो एक साथ काम कर रहे है .
