CM Sukhu may take strict action against DGP and SP today, will hold a press conference at 2:30 pm
शिमला — हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया विवाद उभर आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज दिल्ली से लौटने के बाद पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता के मामले में बड़ा कदम उठा सकते हैं। डीजीपी अतुल वर्मा और एसपी शिमला संजीव गांधी के बीच चल रही तनातनी से सरकार की छवि पर असर पड़ा है, जिससे सीएम सुक्खू नाराज़ बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वह दोपहर 2:30 बजे मीडिया को संबोधित करते हुए इस पूरे मामले पर बड़ी घोषणा कर सकते हैं।
विवाद की जड़ में चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत का मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई 10 मार्च को, जब हिमाचल पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी लापता हो गए थे। 18 मार्च को उनका शव गोबिंदसागर झील (बिलासपुर) से बरामद हुआ। पहले डीजीपी अतुल वर्मा ने 15 मार्च को डीएसपी अमित कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी, जिसमें शिमला और घुमारवीं के एसएचओ भी शामिल थे।
19 मार्च को एम्स बिलासपुर में शव का अंतिम संस्कार करवाया गया, लेकिन उसी दिन मृतक के परिजनों ने शिमला स्थित पावर कॉरपोरेशन दफ्तर के बाहर शव के साथ धरना शुरू कर दिया। रात 10 बजे तक चले इस धरने में परिजनों ने पावर कॉरपोरेशन के पूर्व एमडी हरिकेश मीणा, डायरेक्टर देसराज और शिवम प्रताप सिंह पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए।
परिजनों की शिकायत पर न्यू शिमला थाने में देसराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें बाद में अन्य अधिकारियों के नाम भी जोड़े गए। इसके बाद धरना समाप्त हुआ और एसपी संजीव गांधी ने नई एसआईटी गठित कर जांच को आगे बढ़ाया।
डीजीपी और एसपी के बीच खुला टकराव
मामला तब और उलझ गया जब डीजीपी अतुल वर्मा ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा (एफिडेविट) दायर कर शिमला पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। इसके बाद एसपी संजीव गांधी ने मीडिया से बातचीत में डीजीपी पर कई गंभीर आरोप लगाए और उनके हलफनामे को “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया।
एसपी ने यहां तक कहा कि डीजीपी ऑफिस के एक कर्मचारी का नाम चिट्टा तस्करी में आ चुका है, और डीजीपी ने कोर्ट में जो बयान दिया वह शिमला पुलिस को कमजोर करने की मंशा से प्रेरित था। एसपी संजीव गांधी ने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल कर एफिडेविट की सच्चाई अदालत के सामने रखेंगे।
सीएम सुक्खू नाराज़, विपक्ष हमलावर
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पिछले चार दिनों से दिल्ली में हैं और इस प्रकरण की वजह से वे नाराज़ बताए जा रहे हैं। विपक्ष ने इस पूरे विवाद को बड़ा मुद्दा बना लिया है, जिससे सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सीएम सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं और डीजीपी पर भी कार्रवाई संभव है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री का मानना है कि डीजीपी को शिमला पुलिस की जांच पर सवाल उठाने से पहले एसपी से बातचीत करनी चाहिए थी। इससे न केवल पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई, बल्कि सरकार की साख पर भी असर पड़ा है।
CBI की जांच जारी, आज फिर शिमला आने की चर्चा
हाईकोर्ट पहले ही विमल नेगी की मौत की जांच सीबीआई को सौंप चुका है। चर्चा है कि सीबीआई की टीम आज फिर शिमला पहुंच सकती है और एसपी शिमला से संबंधित दस्तावेज तलब कर सकती है। हालांकि, एसपी संजीव गांधी हाईकोर्ट के फैसले को डबल बेंच में चुनौती देने की बात भी कह चुके हैं।
