मनाली में ब्यास और मनालसु का कहर: टूटी सड़कें, ढहे पुल, उजड़े रेस्टोरेंट, स्वर्ग से त्रासदी बनी घाटी

मनाली में ब्यास और मनालसु का कहर: टूटी सड़कें, ढहे पुल, उजड़े रेस्टोरेंट, स्वर्ग से त्रासदी बनी घाटी

Beas and Manalsu wreak havoc in Manali: Broken roads, collapsed bridges, ruined restaurants – the valley turned from paradise to tragedy

Manali: हिमाचल प्रदेश का मनाली, जिसे दुनियाभर के सैलानी किसी स्वर्ग से कम नहीं मानते, इन दिनों एक भीषण त्रासदी से जूझ रहा है। 26 अगस्त को ब्यास नदी और मनालसु नाले के उफान ने इलाके की सूरत ही बदल डाली। चार दिन गुजर जाने के बाद भी न नेशनल हाईवे बहाल हो पाया है और न ही स्टेट हाईवे। कई जगहों पर सड़कें दरक चुकी हैं, जबकि कहीं-कहीं नदी ने पूरी सड़क को निगल लिया है।

अलेऊ से लेकर समाहन, ओल्ड मनाली, तिब्बती कॉलोनी, वशिष्ठ, बाहंग, नेहरूकुंड, सोलंगनाला और पलचान तक तबाही का मंजर ऐसा है कि शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं। टूटी सड़कें, मलबे के ढेर, ध्वस्त पुल, उजड़े होटल और रेस्टोरेंट – यही तस्वीर अब मनाली की पहचान बन गई है।

तबाही का आलम और टूटी जीवनरेखा

ओल्ड मनाली का ऐतिहासिक पुल, जो खुद बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है, इन दिनों सैकड़ों लोगों की लाइफलाइन बना हुआ है। यही पुल लाहौल और लेह से संपर्क का एकमात्र सहारा है। ढहने के बावजूद लोग इसी पर गुजर रहे हैं, अपनी तकलीफ और उम्मीद दोनों साथ लेकर।

स्थानीय लोग प्रशासन के साथ मिलकर सड़क बहाली के काम में जुटे हैं। जगह-जगह मानव श्रंखला बनाकर डंगे के लिए पत्थर इकठ्ठा किए जा रहे हैं। ओल्ड मनाली से क्लब हाउस तक मनालसु नाले के किनारे करीब 60 से अधिक दुकानें पूरी तरह से उजड़ चुकी हैं। हजारों लोगों का रोजगार छिन गया है। पंचायत घर तक बाढ़ की भेंट चढ़ गया है।

उजड़ा पर्यटन, डूबा रोजगार

“मिनी इज़रायल” के नाम से मशहूर मनाली गांव भी तबाही की चपेट में है। यहां रहने वाली प्रिया बताती हैं कि उनकी आंखों के सामने उनका रेस्टोरेंट बह गया। रेस्टोरेंट के साथ उनका रोजगार और भविष्य भी डूब गया।

वशिष्ठ क्षेत्र में भूस्खलन के कारण तिब्बती कॉलोनी को खाली करवा दिया गया है। बाहंग इलाके में मशहूर शेरे पंजाब रेस्टोरेंट का सिर्फ़ गेट ही बचा है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पलचान में दो घर ब्यास नदी की चपेट में आ चुके हैं, जबकि पतलीकूहल तक कई इलाकों को एहतियातन खाली करवाया गया है।

BRO और ग्रामीण कर रहे बहाली की कोशिश

समाहन इलाके में बीआरओ की मशीनें और सैकड़ों मजदूर लगातार काम कर रहे हैं। लोग भी अपने स्तर पर बहाली की कोशिश में जुटे हैं। बावजूद इसके हालात साफ कहते हैं कि मंज़िल अभी बहुत दूर है।

पर्यटन के बाद सेब बागवानी पर भी संकट

तबाही ने पर्यटन कारोबार को तो पूरी तरह से ठप कर दिया है। अब बागवानों की आर्थिकी पर भी संकट मंडरा रहा है। सेब की फसल तैयार है, लेकिन सड़कों के बंद रहने से बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। बागवानों के चेहरों पर गहरी चिंता साफ झलक रही है।

“ग्लोबल वार्मिंग और अवैज्ञानिक निर्माण जिम्मेदार”

स्थानीय निवासी प्रवीण का कहना है कि मनाली में बार-बार आ रही आपदाओं की जड़ ग्लोबल वार्मिंग और अवैज्ञानिक निर्माण कार्य हैं। फोरलेन बनने के बाद हालात और बिगड़े हैं। सतत विकास की बातें अब सिर्फ़ फाइलों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस आपदा पर गहन शोध और अध्ययन कराना चाहिए और विकास कार्यों को पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए करना होगा।

स्वर्ग से त्रासदी बना मनाली

मनाली, जो कभी सैलानियों का सपना माना जाता था, आज मलबे और बर्बादी के बीच कराह रहा है। सैलानियों के लिए स्वर्ग कही जाने वाली यह वादी अब इंसानी लापरवाही और प्रकृति के प्रकोप का प्रतीक बन गई है।

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