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विस चुनाव में सोलन सीट पर एक बार फिर होंगे आमने सामने ससुर और दामाद 

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हिमाचल विधानसभा चुनावों में दिन-ब-दिन रोमांच बढ़ता जा रहा है। टिकटों की घोषणा के साथ सोलन विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला एक बार फिर से रोमांचक हो गया है। 2017 के चुनावों की ही तरह इस वर्ष भी यहां ससुर और दामाद दोनों बड़ी पार्टियों की तरफ से एक दूसरे से चुनावी मैदान में टकराने को तैयार हैं।
सोलन सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 13वीं विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भी यह जोड़ी आमने सामने थी, लेकिन दामाद को हार का सामना करना पड़ा था। दामाद के मुकाबले ससुर के पास राजनीतिक अनुभव ज्यादा है। ससुर धनीराम शांडिल दो बार विधायक रहे हैं। 2012-17 की कांग्रेस सरकार में वह समाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री रहे थे। धनीराम शांडिल आर्मी से रिटायर होने के बाद राजनीति में आए। सन 1999 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव हिमाचल विकास कांग्रेस (हिविकां) की ओर से लड़ा और जीता। 2004 में वे एक बार फिर से लोकसभा का चुनाव लड़े और सांसद चुने गए। सन 2012 में उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और कांग्रेस के टिकट पर जीते। तब वह वीरभद्र सरकार में समाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री बने थे।
वहीं, राजेश कश्यप अभी हाल ही में राजनीति में उतरे हैं। यह उनका दूसरा चुनाव है। हालांकि, उनके भाई वीरेंद्र कश्यप शिमला से भाजपा के सांसद रह चुके हैं। वहीं, पिछले चुनाव में हार के बाद से लगातार जमीनी स्तर पर लोगों से साथ संपर्क में हैं। ऐसे में आगामी चुनावों में सोलन सीट से एक बार फिर से रोमांचक मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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