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रिटायरमेंट के बाद खुल कर बोलूंगा,राजनीति में हिस्सा नहीं लूंगा- सत्यपाल मलिक 

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अपने बयानों से सुर्खियों मे रहने वाले मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक  तीन महीने के बाद रिटायर हो जाएंगे।रेटायर्मेंट के बाद CBI उनसे पूछ-ताछ कर सकेगी। एक अख़बार के इंटरव्यू में उन्होंने कहा  की रिटायरमेंट के बाद राजनीति  में  हिस्सा नही  लुंगा। लेकिन  मै अपने  बातों को खुल कर रखूँगा इसके अलावा किताब लिखने का प्लान बना रहे है । लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट बाद मलिक साइडलाइन हो जाएंगे, लेकिन  मलिक ने साफ किया है कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। रिटायरमेंट के बाद वे आंदोलनों से जुड़े रहेंगे । जनता के मुद्दों को अपने अंदाज में सियासी तरीके से उठाएंगे। सत्यपाल मलिक एक ऐसे राज्यपाल हैं जिनके आठ साल के कार्यकाल में  4 राज्यों में तबादला किया गया।

सत्यपाल  मलिक कई बार अपने बयानों से सरकार के कान खड़े किए हैं और फ़जीहत  झेले है जो इस प्रकार है ;                      अक्टूबर 2021 में मलिक ने राजस्थान के झुंझनू में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर जाने के बाद मेरे सामने दो फाइलें (मंजूरी के लिए) लाई गईं। एक अंबानी और दूसरी RSS से संबंध रखने वाले व्यक्ति की थी, जो महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली तत्कालीन (PDP-भाजपा) सरकार में मंत्री थे। कहा गया कि इन दो फाइलों को मंजूरी देते हैं, तो उन्हें रिश्वत के तौर पर 300 करोड़ रुपए मिलेंगे। उन्होंने सौदे को रद्द कर दिया।

जब सत्यपाल मलिक बिहार के राज्यपाल थे, राजस्थान के बाड़मेर जिले के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित को SC-ST केस में गिरफ्तार करके पटना ले आया गया था। तब पत्रकार ने सत्यपाल मलिक पर गंभीर आरोप लगाए थे कि मलिक के प्रभाव के चलते उसे फर्जी SC-ST केस में फंसाया गया। इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया था कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जांच के लिए आदेश देना पड़ा था।

मलिक ऐसे पहले राज्यपाल थे, जिन्होंने न केवल कृषि कानून का खुले तौर पर विरोध किया बल्कि केंद्र सरकार को भी आड़े हाथ लेने से नहीं चुके। 17 मार्च 2021 को राजस्थान के झुंझुनूं में मलिक ने कहा था कि कुतिया भी मर जाती है तो उसके लिए हमारे नेताओं का शोक संदेश आता है। 250 किसान मर गए। कोई बोला तक नहीं। यह हृदयहीनता है।

7 जनवरी 2019, तब मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। ANI के मुताबिक इसी दिन मलिक ने बयान दिया कि ‘जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था किसी भी अन्य राज्य से अच्छी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लॉ एंड ऑर्डर की तुलना बिहार की राजधानी पटना से की। उन्होंने कहा है कि पटना में एक दिन में जितनी हत्याएं हो जाती हैं, उतनी हत्याएं कश्मीर में हफ्ते भर में होती है ।

पहली बार मलिक को 30 सितंबर 2017 को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। महज 10 महीने बाद ही उन्हें बिहार से हटाकर जम्मू कश्मीर भेज दिया गया।

23 अगस्त 2018 को वे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बने। उनके राज्यपाल रहते ही अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 को खत्म किया गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बने।

दो महीने बाद, यानी 30 अक्टूबर 2019 को मलिका का एक बार फिर तबादला हुआ और गोवा जैसे छोटे राज्य का राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया, लेकिन मलिक वहां भी ज्यादा दिन नहीं टिक सके।

महज नौ महीने बाद अगस्त 2020 में उन्हें मेघालय का राज्यपाल बना दिया गया।

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