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कई गोलियां लगने के बाद भी शहीद पवन कुमार धंगल ने एक आतंकी को किया था ढेर, पिता बोले- गर्व है बेटे पर   

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पदगामपोरा में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए पवन कुमार धंगल को श्रद्धांजलि देने के लिए रामपुर में हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने जगह-जगह उन्हें फूलमालाओं से अंतिम विदाई दी। शहीद की अंतिम विदाई में स्कूली बच्चे भी नेशनल हाईवे पांच पर उतर आए। पूरा रामपुर क्षेत्र ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, पवन कुमार धंगल तेरा नाम अमर रहेगा’ के नारों से गूंज उठा।

देश पर कुर्बान पवन कुमार धंगल के पिता शिशुपाल को बेटे की शहादत पर गर्व है। शिशुपाल ने दुख प्रकट करते हुये बताया कि उन्हे इस बात पर गर्व है कि उनके बेटे ने देश के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। उन्होने कहा कि उनके दो चार बेटे होते तो वह उन्हें भी देश की रक्षा के लिए फौज में भेज देते। उन्होंने कहा कि पवन पहले देश का बेटा था, बाद में मेरा बेटा। पवन ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, इसका मुझे और देश को गर्व है। शहीद पवन धंगल शिशुपाल धंगल का इकलौता बेटा था। पवन की अभी शादी भी नहीं हुई थी।

शहीद की पार्थिव देह वीरवार को चंडीगढ़ से रामपुर पहुंची थी। सेना के जवानों ने छह तोपों की सलामी देकर राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद की माता भजन दासी और बहन प्रतिभा का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद की पार्थिव देह के साथ पिथ्वी आए नायब सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि गोलियां लगने के बाद भी पवन ने एक आतंकी को गोलियों से छलनी कर दिया। नायब सूबेदार ने बताया कि पवन के शरीर पर 16 गोलियां लगीं, जिस कारण शरीर से बहुत खून बह गया और अस्पताल पहुंचने तक पवन देश के लिए कुर्बान हो गए।

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