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ऊना के युवाओं में घुल रहा चिट्टे का जहर, हेरोइन ने ली परंपरागत नशों की जगह

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ऊना के युवाओं में घुल रहा चिट्टे का जहर, हेरोइन ने ली परंपरागत नशों की जगह, जिला में 5 साल में 5 गुना बढ़े चिट्टे के मामले, 10 साल में हो चुकी कई युवाओं की मौत। 
 
धीमा जहर कहा जाने वाला नशा युवाओं में लगातार पैर पसारता जा रहा है। जिला ऊना में हालत यह है कि पिछले 5 साल में हेरोइन के ही करीब 5 गुना मामले बढ़ कर सामने आ चुके हैं। पिछले 10 सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई तो जिले में कई युवाओं ने चिट्टे के चलते जान भी गंवाई है। हालांकि एक दशक पहले तक यहां चरस, अफीम, चूरा पोस्त, गांजा और प्रतिबंधित दवाओं जैसा नशा अधिक प्रचलित था। लेकिन पंजाब सीमा से सटे इस जिला में पिछले एक दशक से चिट्टे के कारोबार ने खासे पैर फैलाए हैं। एक तरफ जहां पुलिस विभाग इस नशा तस्करी को चिंतनीय मानता है वहीं दूसरी तरफ मनोचिकित्सक भी युवाओं में बढ़ते चिट्टे के प्रचलन को खतरनाक बताते हैं।
 
जिला ऊना में चिट्टा कारोबार एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन के लिए लगातार सिरदर्द बनता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ युवाओं को भी मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहा है। हालत ऐसी है कि धीमा जहर कहे जाने वाले इस नशे का कारोबार पिछले 5 साल में 5 गुना तक बढ़ा है।
 
 जिला ऊना में वर्ष 2017 में जहाँ चिट्टे के 13 मामले सामने आये थे वहीं चरस के 42 मामले पुलिस पकड़े गए थे। वर्ष 2018 में चिट्टे के मामले दोगुना से भी बढ़कर 34 मामले पुलिस ने दर्ज किए ,वहीं चरस के मामले 2017 के मुकाबले कम होकर 39 हो गए। जबकि 2019 में हेरोइन के मामलों में ख़ासा उछाल आया और पुलिस ने 54 केस दर्ज किए जबकि चरस के मामले कम होकर 22 रह गए।  2020 में हेरोइन के मामले 2019 के बराबर ही रहे और चरस के मामले कम होकर 18 रह गए। जबकि वर्ष 2021 में पुलिस ने चिट्टे के 67 केस दर्ज किया और चरस के मामलों में भी हल्की वृद्धि दर्ज की गई। 
 
वहीं इस साल मात्र 11 महीनों में ही चिट्टे के 66 मामले पुलिस दर्ज कर चुकी है जबकि चरस के मात्र 4 मामले ही बने है। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से जिला ऊना के युवाओं में चिट्टे की लत्त लगातार बढ़ती जा रही है। पुलिस भी चिट्टे के लगातार बढ़ते आंकड़े को चिंता का विषय मानते है। 
 
डीएसपी हेडक्वार्टर अंकित शर्मा ने कहा कि पिछले 5 साल में इस नशे के कारोबार में करीब 5 गुना तक बढ़ोतरी हुई है। जिससे साफ पता चलता है कि इस नशे की खपत जिला में 5 सालों में काफी बढ़ी है। और पंजाब से सटा होने के चलते यह नशा यहां पर काफी आसानी से उपलब्ध भी हो पा रहा है। जो युवा पीढ़ी को मौत के मुंह में धकेलने का काम करता है। इसके अतिरिक्त इस नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा कई आपराधिक गतिविधियों में भी संलिप्त हो जाते हैं जिनमें चोरी डकैती आदि शामिल होते हैं।

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