नेशन स्पीक्स, रंजीत यादव
हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारियां को मद्देनहर रखते हुए सभी प्रमुख पार्टियां जनता को रिझाने के लिए लुभावने वादे करने लगी है। बहरहाल हिमाचल के चुनावी इतिहास को देखे तो 1985 के बाद से यहां की जनता ने हर पांच साल में सरकार बदल दी है। हालांकि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा ने ये मिथक तोड़ चुकी है और लगातार सरकार बनाने में कामयाब हुई है। अब सवाल यह बनता है की क्या हिमाचल में जयराम की सरकार दोबारा आएगी ? इसका उत्तर है, अब तक ये आसान था, लेकिन जब से आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकार बनाया है तब से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। क्योंकि पंजाब में जीत हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी दिल्ली मॉडल और लुभावने वादे करके जनता को आकर्षित कर रही है। वहीं कांग्रेस भी आम आदमी की नक्से कदम चल रही है और उन्होंने हिमाचल के जनता से दस लुभावने वादे कर दी है जो कांग्रेस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। कह सकते हैं कि इस बार हिमाचल की जनता को सरकार चुनने में मुश्किलें तो बढ़ाएगा ही, कांग्रेस और भाजपा को भी जीतोड़ मेहनत भी कराएगा। विधानसभा चुनाव की तैयारियों की बात करें तो अब तक कांग्रेस आगे नजर आ रही है, पार्टी की ओर से 300 यूनिट मुफ्त बिजली और गरीब महिलाओं को 1500 रुपये सहायता राशि की घोषणा करके आप (AAP) पर बढ़त बना ली है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव पर नजर डाले तो पता चलेगा कि उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड मणिपुर,गोवा,और पंजाब में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली है। ऐसे में कांग्रेस हिमाचल में सत्ता पाने के लिए लालायित दिख रही है लेकिन कांग्रेस के लिए अपने अंदरुनी मामलों से निपटना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, दरअसल कांग्रेस आलाकमान से नाराज चल रहे G-23 के प्रमुख सदस्य आनंद शर्मा हिमाचल के वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जिसका असर जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को मनोबल तोड़ सकती है। अगर भाजपा कांग्रेस की पुराने कार्यकर्ताओं को सेंधमारी कर लेती है तो कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। हालांकि पार्टी के बड़े चेहरे जनता की नब्ज टटोलने के लिए दौरे किए जा रहे हैं। राजीव शुक्ला ,जयराम रमेश, और हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के बीच हुई बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा की गई जिसे मीडिया ने सरकार के खिलाफ उठाए हैं, लेकिन सरकार ने उन पर कोई काम नहीं किया है, ऐसे मुद्दों को कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में भी शामिल कर सकती है। कांग्रेस एक और दाव खेल सकती है जो बीजेपी ने 2017 में अपनाया था, उस वक्त भाजपा ने सामूहिक तौर पर चुनाव लड़ा था और विधायक दल ने मुख्यमंत्री को तय किया था। ठीक उसी प्रकार कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री के लिए किसी का नाम सामने नहीं किया है। कांग्रेस को इसका फायदा कितना मिलेगा चुनाव के बाद ही पता लगना।
वहीं भाजपा की बात करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभी सियासी दलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि जिन्होंने मुफ्त की रेवड़ियों का ऐलान कर वोट लेने का सहारा लिया है और मुफ्त की रेवड़ियां बांटने का अभ्यास देश के विकास के लिए हानिकारक है। ऐसे में भाजपा की क्या रणनीति होगी और जनता के सामने क्या वादे करेगी यह देखने योग्य होगा। हिमाचल प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 2017 की चुनाव में 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा ने हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा जैसे राज्यों में चुनाव से सबक लेते हुए हिमाचल में भी 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को टिकट न देने का मन बनाया है हालांकि आधिकारिक रूप से इसका कोई ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी युवाओं को ज्यादा मौका देना चाहती है। अगर ऐसा होता है तो 70 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं में सबसे पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का है, जिनकी उम्र 78 साल हो चुकी है। वहीं महेंद्र सिंह ठाकुर, कैबिनेट मंत्री सुरेश भारद्वाज, रमेश ध्वाला, कर्नल इंद्र सिंह, पवन नैयर, गुलाब सिंह ठाकुर, महेश्वर सिंह यह बड़े नाम हैं जो 70 साल की आयु को पार कर चुके हैं। इसके भरपाई के लिए बीजेपी ऐसे वामपंथी और कांग्रेसी नेताओं को अपने खेमे में शामिल कर सकती है, जो बिना पार्टी चिन्ह के भी चुनावी रण में उतरने की तैयारी में हो ऐसे नेता उन इलाकों में पार्टी की मदद कर सकते हैं, जहां कांग्रेस मजबूत स्थिति में है।
बात करें वर्तमान सरकार की तो जयराम सरकार ने जनता को 125 यूनिट फ्री बिजली दे रही है, इससे पहले सरकार ने 60 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की थी, हालांकि चुनावी साल को देखते हुए सरकार की ओर से आनन-फानन में ये फैसला लिया गया, घोषणा के वक्त जय राम ठाकुर ने कहा था कि सरकार इससे ज्यादा मुफ्त बिजली दे सकती थी, लेकिन राज्य पर आर्थिक स्थिति को कर्जे को देखते हुए ऐसा मुमकिन नहीं है। अब ये ध्यान देनी की बात है कि जयराम सरकार जनता को कितनी पसंद आई है। जनता ही तय करेगी सरकार दोहराएगी या दूसरे को मौका देगी।
