कांगड़ा में प्रकृति का कहर: बिना भूस्खलन धँस गया पूरा गांव, 13 मकान जमींदोज़

कांगड़ा में प्रकृति का कहर: बिना भूस्खलन धँस गया पूरा गांव, 13 मकान जमींदोज़

Nature’s fury in Kangra: Entire village submerged without landslide, 13 houses razed to the ground

कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश),

16 सितंबर 2025

Report:  राहुल चावला

 हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में एक अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा ने सभी को चौंका दिया है। थुरल उपमंडल के बछवाई गरडेर गांव में बिना किसी भूस्खलन या पहाड़ी गिरावट के अचानक ज़मीन धँस गई, जिससे 13 मकान पूरी तरह तबाह हो गए और पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है।

प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से क्षेत्र को सील कर दिया है, जबकि सेना राहत और बचाव कार्यों में जुट गई है।


कैसे हुआ हादसा?

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, 15 सितंबर की रात अचानक भारी बारिश हुई। इसके तुरंत बाद ज़मीन में कंपन और दरारें आनी शुरू हो गईं। लोग अपने-अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

सुबह तक स्थिति और भी भयावह हो गई —

  • करीब 1 किलोमीटर क्षेत्रफल में ज़मीन 10 फीट तक धँस गई।

  • मुख्य सड़क में 11 से 15 फीट गहरी दरारें पड़ गईं, जिससे सड़क दो हिस्सों में टूट गई।

यह घटना भूस्खलन नहीं बल्कि जमीनी धँसाव (land subsidence) के कारण हुई, जो इस क्षेत्र में पहली बार देखा गया है।


सेना ने किया मोर्चा संभालने का काम शुरू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सेना की मदद ली।

सेना के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अर्पित प्रीक ने बताया:

“इलाके में हालात बेहद नाज़ुक हैं। सेना युद्धस्तर पर राहत कार्य में लगी है। पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है और मेडिकल टीमें सक्रिय रूप से उपचार प्रदान कर रही हैं।”


ग्रामीणों की ज़ुबानी: डर और राहत की दास्तान

ऊषा कुमारी, पीड़ित ग्रामीण:

“रात में ज़मीन अचानक खिसकने लगी। जैसे-तैसे हम बाहर निकले। सुबह तक हमारा पूरा घर ज़मीन में समा चुका था।”

सुनीता, एक अन्य पीड़िता:

“हमारा सारा सामान घर में ही रह गया था। शुक्र है सेना समय पर पहुंची और सब कुछ सुरक्षित बाहर निकाल पाई।”

एक स्थानीय निवासी ने कहा:

“ना कोई भूस्खलन, ना कोई पहाड़ी टूटी — फिर भी ज़मीन समा गई। हमने जीवन में ऐसा मंजर कभी नहीं देखा।”


इलाका सील, गांव बना छावनी

फिलहाल बछवाई गरडेर गांव को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

  • सेना, प्रशासन और मेडिकल टीमें राहत और पुनर्वास कार्य में जुटी हैं।

  • किसी भी बाहरी व्यक्ति को क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं है।

  • ग्रामीणों को सुरक्षित कैंपों में स्थानांतरित किया गया है।

हालांकि 13 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, लेकिन सभी लोग सुरक्षित बचा लिए गए, जो एक बड़ी राहत है।

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