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G-20 SUMMIT : इंडोनेशिया के बाली में राष्ट्राध्यक्षों की जमावड़ा,ब्लादमीर पुतिन मीटिंग से किया किनारा, पीएम मोदी 20 से ज्यादा बैठकों में हिस्सा लेंगे

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आज से  इंडोनेशिया में शुरू हो रहे G -20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाली में मौजूद हैं। उनके साथ इस शिखर सम्मलेन में  एनएसए अजीत डोभाल व विदेश मंत्री एस जयशंकर भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री 20 से ज्यादा बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनमें खाद्य, सुरक्षा, ऊर्जा, यूक्रेन संकट जैसे कई अहम मुद्दों पर तमाम राष्ट्राध्यक्षों के साथ चर्चा करेंगे। 

 सबसे पहले जानते हैं जानिए G-20 है क्या ?

G-20 को ग्रुप ऑफ ट्वेंटी भी कहा जाता है। यह यूरोपियन यूनियन एवं 19 देशों का एक अनौपचारिक समूह है। -G-20 शिखर सम्मेलन में इसके नेता हर साल जुटते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को कैसे आगे बढ़ाया जाए इस पर चर्चा करते हैं. इसका गठन साल 1999 में हुआ था।साथ ही यह एक मंत्रिस्तरीय मंच है जिसे G7 द्वारा विकसित एवं विकासशील दोनों अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग से गठित किया गया था। 

जब इसका गठन हुआ था तब यह वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों का संगठन हुआ करता था।  इसके पहले सम्मेलन की बात करें तो दिसंबर 1999 में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हुआ था। गौरतलब है कि साल 2008 में दुनिया ने भयानक मंदी का सामना किया था। इसके बाद इस संगठन में भी बदलाव हुए और इसे शीर्ष नेताओं के संगठन में तब्दील कर दिया गया। इसके बाद यह निश्चय किया गया कि साल में एक बार G20 राष्ट्रों के नेताओं की बैठक की जाएगी। साल 2008 में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में इसका आयोजन किया गया। वहीं G-20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। 

बाली में प्रधानमंत्री और राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात 

इंडोनेशिया में चल रहे इस शिखर सम्मलेन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को रिसीव करने के लिए इण्डोनेसाई प्रधानमंत्री बीडीडो  खुद चलकर उनके होटल तक आए। सम्मेलन के बाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक वार्ता हुई। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के पीएम मार्क रूट के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन वैश्विक नेताओं के लिए विविध मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान करने के अद्भुत अवसर है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व चीनी समकक्ष राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जी-20 शिखर सम्मेलन से दूरी बना ली है। हालांकि, उन्होंने इस बैठक में भाग लेने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को अपने प्रतिनिधि के रूप में भेजा है। 

दुनिया के विकास के लिए भारत महत्वपूर्ण- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वैश्विक विकास के लिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण है। क्योंकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा, हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 2030 तक हमारी आधी बिजली अक्षय स्रोतों से पैदा होगी। आगे कहा, भारत में स्थायी खाद्य सुरक्षा के लिए हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं और बाजरा जैसे पौष्टिक और पारंपरिक खाद्यान्नों को फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं। बाजरा वैश्विक कुपोषण और भूख को भी दूर कर सकता है।

यूक्रेन युद्ध और खाद्य संकट दुनिया में मचाई तबाही :  पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज की खाद की कमी कल का खाद्य संकट है, जिसका समाधान दुनिया के पास नहीं होगा। हमें खाद और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और सुनिश्चित बनाए रखने के लिए आपसी समझौता करना चाहिए। पीएम ने कहा, मैंने हमेशा कहा है कि हमें यूक्रेन में युद्धविराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का रास्ता खोजना होगा। पिछली सदी में द्वितीय विश्व युद्ध ने दुनिया में कहर बरपाया था जिसके बाद उस समय के नेताओं ने शांति का रास्ता अपनाने का गंभीर प्रयास किया। अब हमारी बारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन ने के दौरान फूड एनर्जी सिक्योरिटी सत्र में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना और यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे दुनिया में तबाही फैल गई है। उन्होंने कहा कि यूएन जैसी संस्थाएं इन मुद्दों पर विफल रही हैं। इसलिए हम सभी को मिलकर यूक्रेन युद्ध रोकने का रास्ता निकालना होगा। 

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