Did not get a chance in Himachal, Punjab groomed him: Shabd Gautam leaves for Asian Championship
बिलासपुर : हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के 15 वर्षीय वॉलीबॉल खिलाड़ी शब्द गौतम ने वो कर दिखाया, जो अब तक राज्य का कोई भी खिलाड़ी नहीं कर सका था। भारतीय अंडर-16 वॉलीबॉल टीम में चयनित होकर शब्द गौतम ने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि हिमाचल का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है। वह इन दिनों थाईलैंड में 12 से 19 जुलाई तक होने वाली एशियन चैंपियनशिप के लिए भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जब अपने ही राज्य ने किया अनदेखा
साल 2023 में जब शब्द के परिजन उनका भविष्य संवारने के लिए हिमाचल के ऊना स्थित खेल विभाग के स्पोर्ट्स हॉस्टल और शिक्षा विभाग के छात्रावासों के चक्कर काट रहे थे, तब उन्हें हर जगह निराशा ही मिली। वजह बताई गई—हाइट कम है।
शब्द उस समय केवल 12 साल के थे और उनकी हाइट 160.02 सेंटीमीटर थी। खेल विभाग के नियमों के मुताबिक अंडर-14 वर्ग में 160 सेंटीमीटर न्यूनतम हाइट की शर्त है, बावजूद इसके शब्द को ट्रायल का भी मौका नहीं दिया गया।
पिता भी रहे नेशनल खिलाड़ी, बेटे के लिए की मिन्नतें
शब्द गौतम के पिता पंकज गौतम खुद भी एक नेशनल वॉलीबॉल प्लेयर रह चुके हैं। उन्होंने बेटे की प्रतिभा को पहचाना और उसे आगे बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास किए। मगर जब हर दरवाजा बंद मिला तो वे थक-हार कर पंजाब के संगरूर स्थित साईं हॉस्टल पहुंचे।
पंजाब ने संवारा हिमाचल का सितारा
संगरूर में शब्द का ट्रायल लिया गया और उसकी खेल प्रतिभा को तुरंत पहचाना गया। मई 2023 में उसे हॉस्टल में दाखिला मिला और तब से वह लगातार प्रशिक्षण ले रहा है। आज उसकी हाइट 177.8 सेंटीमीटर हो चुकी है और वह भारतीय टीम का हिस्सा बन चुका है।
कोच की सफाई: “मामला याद नहीं”
इस पूरे मामले पर जब इंदिरा गांधी खेल परिसर, शिमला के वॉलीबॉल कोच सतीश से पूछा गया तो उन्होंने इसे पुराना मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
खेल विभाग की प्रतिक्रिया
खेल विभाग के एडिशनल डायरेक्टर हितेश आजाद ने शब्द को भारतीय टीम में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि विभाग पारदर्शिता से खिलाड़ियों का चयन करता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अंडर-14 वर्ग में चयन के लिए न्यूनतम हाइट 160 सेंटीमीटर है और संभव है कि शब्द उस समय इस मापदंड को पूरा नहीं करते रहे हों।
निष्कर्ष:
शब्द गौतम की सफलता उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें अपने ही राज्य में अवसर नहीं मिल पाता। यह कहानी सिस्टम की खामियों को उजागर करने के साथ-साथ इस बात का प्रमाण है कि अगर जुनून और समर्थन हो, तो मंजिल किसी और राज्य से होकर भी मिल सकती है।
