Clouds burst, shattering lives, devastating Swarghat, fields washed away, and so did hopes.
Bilaspur: गुरुवार सुबह का वक्त, जब स्वारघाट के मतनोह गांव में लोग अपने खेतों की हरियाली देखने जा रहे थे – तभी अचानक काले बादलों ने कहर बरपा दिया।
कुछ ही मिनटों में पहाड़ी से आया पानी और मलबा लोगों के सपनों को बहा ले गया।
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खेत तबाह,
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आम के बगीचे उजड़ गए,
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खड़ी फसलें बह गईं,
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और जो मिट्टी सालों की मेहनत से उपजाऊ बनी थी, वो भी बहकर कहीं दूर चली गई।
“अब क्या बोएंगे, और कैसे जिएंगे?” – यही सवाल हर चेहरे पर था।
“हमें अब कुछ नहीं बचा…” – ग्रामीणों की प्रशासन से गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि इस तबाही ने लाखों रुपये का नुकसान किया है, लेकिन इससे भी बड़ा नुकसान है भविष्य की आशा का टूट जाना।
राजस्व विभाग की टीम पहुंच चुकी है, लेकिन लोगों को चाहिए सिर्फ राहत नहीं, सुरक्षा का भरोसा।
हिमाचल का हाल बेहाल – 566 सड़कें, 525 ट्रांसफार्मर ठप
राज्यभर में हालात चिंताजनक हैं:
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566 सड़कें बंद
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525 ट्रांसफार्मर खराब
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281 जल योजनाएं ठप
कुल्लू, मंडी, शिमला, कांगड़ा, बिलासपुर जैसे जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। लोग अंधेरे और प्यास के बीच फंसे हैं।
मानसून ने छीनी 419 जानें – हजारों परिवार उजड़ चुके
20 जून से 17 सितंबर के बीच:
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419 मौतें,
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45 लोग अब भी लापता,
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587 पक्के मकान और 934 कच्चे घर पूरी तरह तबाह,
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2,410 मवेशियों की मौत,
ये आंकड़े नहीं… ये किसी की मां, किसी का भाई, किसी की छत और किसी का सपना है।
नयना देवी में रात भर बरसता रहा कहर – अभी भी खतरा टला नहीं
बीती रात:
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नयना देवी: 140.8 मिमी बारिश
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बिलासपुर: 122.8 मिमी
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नाहन, मंडी, कसौली, पालमपुर समेत कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है।
24 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी है।
लोगों की आँखों में सिर्फ पानी नहीं, डर भी भर गया है।
नाहन में नगर परिषद तक डूबी – दफ्तरों और दुकानों में घुसा पानी
सुबह-सुबह जब नगर परिषद के कर्मचारी दफ्तर पहुंचे, तो देखा – सिर्फ फाइलें नहीं, पूरे सपने भीग चुके थे।
दुकानों में घुसे पानी ने व्यापारियों की रोज़ी रोटी को खतरे में डाल दिया। नगर परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन सवाल है – “क्या हर बार तबाही के बाद ही व्यवस्था जागेगी?”
मंडी का सैण मोहल्ला – जब घर, वाहन और बच्चे सब मलबे में घिर गए
सुबह 6 बजे, मंडी के सैण मोहल्ला में नाले ने फिर तबाही मचाई।
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मलबा घरों और दुकानों में घुसा
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वाहन दब गए
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बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित निकाला गया
तीसरी बार हुआ ऐसा – अब लोग नहीं चाहते “जुगाड़ू समाधान”, स्थायी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
अब नहीं चाहिए आश्वासन – चाहिए सुरक्षा
हिमाचल की धरती खूबसूरत जरूर है, लेकिन आज डर और दर्द की ज़मीन बन चुकी है।
लोगों को चाहिए:
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मजबूत retaining walls
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समय पर अलर्ट सिस्टम
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जल निकासी की योजनाएं
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और सबसे ज़रूरी – सरकार की गंभीरता
“हर बार सिर्फ मुआवजा क्यों?”
क्यों नहीं तैयार है सिस्टम ऐसी आपदाओं के लिए?
क्यों नहीं है गांवों में बारिश मापने और अलर्ट देने की तकनीक?
क्यों हर बार मरने के बाद ही उठती हैं व्यवस्थाएं?
समाप्ति नहीं, शुरुआत होनी चाहिए
हर तबाही एक सीख होती है। हिमाचल के लोगों ने हमेशा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जिया है। अब वक्त है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसा तंत्र बनाए जिससे
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जानें भी बचें,
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जिंदगी भी चले,
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और भविष्य भी सुरक्षित हो।
