हिमाचल प्रदेश में अब बागवानों के लिए माहौल बेहरत है क्यूंकि अब यूनिवर्सल कार्टन के तहत ही बिक्री होगी और लंबे समय से शोषित हो रहे बागवान उचित तरीके से अपने फलों को बेच सकेंगे और इसी सीजन से सेब की खरीद प्रति किलोग्राम के हिसाब से होगी | इसका रास्ता अब साफ हो गया है। बागवानों को मंडियों में अधिकतम 24 किलो की पेटी भरकर लानी होगी। मंडियों में अब यूनिवर्सल कार्टन के आधार पर ही बिक्री होगी। इससे बागवान बिचौलियों के शोषण से बच सकेंगे।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ने बागवानों की लंबित मांग को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि अब मंडियों में यूनिवर्सल कार्टन में ही सेब की बिक्री होगी। उन्होंने कहा कि जब तक बाजार में यूनिवर्सल कार्टन की उपलब्धता नहीं होती, तब तक सेब का दाम किलो के हिसाब से मिलेगा।
कार्यवाई के लिए 5 सदस्य कमेटी गठित
APMC एक्ट की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्यवाई करने के लिए सरकार ने 5 सदस्य कमेटी का गठन किया है। उन्हें दोषियों के खिलाफ कार्यवाई करने की शक्तियां भी दी हैं। सरकार ने सभी SDM, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के अलावा सभी डिप्टी डायरेक्टर, सीनियर मार्केटिंग ऑफिसर और सभी APMC सचिवों को कार्यवाई के लिए अधिकृत कर दिया गया है।
कृषि सचिव ने जारी की अधिसूचना
सरकार की इस घोषणा के बाद कृषि सचिव ने इस बात पर अधिसूचना भी जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, सेब बेचने के लिए बागवानों को अपने घरों में ही तैयार फसल का वजन करना होगा। बागवानों को पेटी पर न मिटने वाले मार्कर के साथ वजन लिखना जरूरी किया गया है। बागवान पेटी में अधिकतम 24 किलो ही भर सकेंगे। मंडियों में वजन करने वाली मशीन की भी उपलब्धता होगी, ताकि पेटियों का वजन किया जा सके। इस कदम से अब सेब बागवान बिचौलियों के शोषण से बच सकेंगे। इससे पहले बिचौलियों के दबाव में सेब बागवान एक पेटी में कभी 28 तो कभी 30 किलो सेब डालते थे। पेटी में सेब की मात्रा बढ़ाने के बावजूद बागवानों को पेटी के हिसाब से ही दाम मिल रहा था और आढ़ती बाद में २४ किलो की पति के हिसाब से सेब बेच कर लाखो करोड़ो का मुनाफा कमा रहे थे ऐसे में अब प्रति किलोग्राम दाम मिलने से बागवानों को फायदा होगा।
क्या कहते हैं सेब बागवान?
बागवानों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार आने वाले वक्त में अन्य मांगों को भी पूरा करेगी, हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में सेब का बड़ा योगदान है | ऐसे में सरकार का सहयोग बागवानों के हित में यह कदम उठाना स्वागत योग्य है
कुल मिलकर यह कहा जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के यूनिवर्सल कार्टन में सेब बिक्री के फैसले से बागवान खुश हैं | विकासशील बागवान अनिल ठाकुर, विनय ठाकुर और सुहील कुमार ने कहा कि सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है. बशर्ते सेब मंडियों में इन नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए | उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखने के लिए उप समिति का भी गठन किया गया है, लेकिन बावजूद इसके सेब सीजन के दौरान इन नियमों का पालन करवाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा. यदि इन नियमों का सख्ती से पालन होता है, तो इससे सेब बागवान शोषण से बचेंगे और साल भर की मेहनत का सही दाम मिल सकेगा |
क्या कहते हैं आढ़ती
इससे पहले बागवान समय पर सूचना न दिए जाने का बहाना देते हुए नज़र आते थे लेकिन अब बागवानों से किलो के हिसाब से सेब खरीदने पर अब आढ़ती आनाकानी नहीं कर सकते। क्यूंकि सरकार ने उन्हें इस व्यवस्था को अपनाने के लिए पूरा समय दिया है। उन्हें किलो के हिसाब से सेब खरीदने की समय से पहले जानकारी उपलब्ध करवा दी गई है। अब उनके पास कोई बहाना नहीं रहेगा कि वह बागवान से किलो के हिसाब से सेब न खरीदें।
शिमला में सेब सीजन के दौरान काम के लिए आने वाले आढ़ती सुदर्शन सिंह का कहना है कि सरकार ने उचित समय पर जानकारी दी है यह आढ़तियों के लिए भी अच्छा फैसला है अब साफ़ तरीके से काम हो सकेगा।
