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हिमाचल प्रदेश के 2022 की वो ख़बरें जो देश और प्रदेश में सुर्खिया बनी 

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हिमाचल प्रदेश के लिए वर्ष २०२२ कुछ मीठी तो कुछ कड़वी छाप छोड़कर अलविदा लेने को है। इस वर्ष प्रदेश में कुछ ऐसे घटना भी घटित हुई जो देश और प्रदेश में सुर्खियां बनी। प्रदेश की शुरुआत कोविड की ढील और ठण्ड के साथ हुआ लेकिन अंत राजनीतिक सरगर्मियां के साथ अंत हुआ। प्रदेश के लोगों ने रिवाज  जारी रखा और सत्ता की चाबी भाजपा से छीनकर कांग्रेस को सौंपी। फिर कांग्रेस ने सबको चौंकाते हुए हमीरपुर के सुखविंदर सिंह सुक्खू को CM बनाया, जो कभी मंत्री तक नहीं बने। PM मोदी कुल्लू दशहरे के साक्षी बने।  
तो आइए जानते है प्रदेश में कौन से ख़बरें देश और प्रदेश  में सुर्खियां बनी 

रिवाज जारी रहा राज बदला 
साल 2022 के आखिरी माह दिसंबर में हिमाचल में सत्ता परिवर्तन हुआ। पहाड़ों की जनता ने 35 साल से चली आ रही सत्ता परिवर्तन की परंपरा को बरकरार रखा। डबल इंजन की सरकार का दम भरने वाली और हिमाचल में रिवाज बदलने का दावा करने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव हार गई। कांग्रेस ने 40 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा 25 सीटों पर सिमट गई। पार्टी के 8 मंत्री चुनाव हार गए। कांग्रेस में CM की रेस में शामिल 3 बड़े नेता कौल सिंह ठाकुर, आशा कुमारी और रामलाल ठाकुर भी चुनाव नहीं जीत सके। कांग्रेस को 43.90 और भाजपा को 43.00 प्रतिशत वोट पडे़। इस बार चुनावी मैदान में कुल 412 प्रत्याशी थे।
 
पहली बार निचले हिमाचल का नेता बना मुख्यमंत्री
साल 2022 में प्रदेश की कांग्रेस की सरकार बनने पर पार्टी ने इतिहास में पहली बार लोअर हिमाचल को CM पद दिया। हमीरपुर जिले की नादौन सीट से विधायक बने सुखविंद्र सिंह सुक्खू को बड़े राजनीतिक ड्रामे के बाद मुख्यमंत्री बनाया गया। इससे पहले कांग्रेस के कार्यकाल में मुख्यमंत्री रहे डॉ. यशवंत सिंह परमार से लेकर रामलाल ठाकुर और वीरभद्र सिंह तक, अपर हिमाचल यानि शिमला संसदीय क्षेत्र से ही मुख्यमंत्री बनते रहे।
प्रदेश में पेपर लीक 

 हिमाचल चयन आयोग ने मई महीने में 198 पदों के लिए आवदेन मांगे थे, लेकिन बाद में अक्तूबर 2022 में 121 पद और जोड़े गए थे. हिमाचल में पेपर लीक होने के मामले लगातार सामने आ रहे है. इससे पहले बीते साल पुलिस भर्ती (Himachal Police Exam Leak) का पेपर लीक हो गया था. जिसे बाद में सरकार ने रद्द कर दिया.

 

 सोलन जिले के परवाणू में टिंबर ट्रेल केबल कार हादसा 
सोलन जिले के परवाणू में टिंबर ट्रेल केबल कार हादसा पूरे देश और प्रदेश में सुर्खियां बनी। 1988  में स्थापित इस केबल कार की दूसरी घटना थी इसके पहले वर्ष 1992 में भी ऐसे ही घटना घटी थी तब एयरफोर्स रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया था और सभी फंसे सैलानियों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला गया और इस वर्ष के जून में 30 साल के बाद ऐसा ही हादसा  देश की नजरों में आया ।
इस  हादसे में 11 लोगों को रेस्क्यू करके बाहर निकला गया था। 2 किमी के करीब लंबे इस रोपवे पर कुछ दूरी को तय करने के लिए 8 मिनट का वक्त लगता है.  एक ट्रॉली में तकनीकी खराबी की वजह से  ट्राली  चलते हवा में अटक गई।  छह घंटे तक  11 टूरिस्ट फंसे रहे, जिन्हें दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने रस्सियों के सहारे रेस्क्यू करके बाहर निकाला।
एक छोटी ट्रॉली बीच में फंसी ट्रॉली के पास भेजी गई और फिर अंदर फंसे टूरिस्ट को नीचे उतारा गया। हालांकि, रस्सियों के सहारे टूरिस्ट ने उतरने से इंकार कर दिया था, लेकिन काफी मनाने के बाद ये लोग राजी हुए। इस हास्दे में 10 लोग एक ही परिवार से थे और दिल्ली के रहने वाले थे
 
 जयराम की सरकार प्रदेश की महिलाओं को दी बड़ी सौगात 
  पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर  ‘नारी को नमन’  योजना के तहत हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में महिला यात्रियों को बस किराए में 50 प्रतिशत की रियायत की शुरुआत की। इस योजना से प्रदेश में  रोजाना सफर करने वाली  प्रदेश की 1.25 लाख महिलाओं को लाभ मिल रहा है। अगस्त

  बादल फटने से लेकर लैंडस्लाइड की घटनाएं होती रही
प्रदेश में हुए मूसलाधार बारिश की वजह से नदियां और नाले उफान में रही। इसके अलावा कई जिले में बादल फटने से भयावह स्थिति बनी। प्रदेश में प्राकृतिक आपदाएं की वजह से राज्य कोष विभाग को भारी नुकसान हुआ। और कई जान माल का भी नुकसान हुआ। इस दौरान प्रदेश भर में 284 लोगों की मौत हुई। 2000 करोड़ का नुकसान हुआ। 169  पूरी तरह से खतिग्रस्त हुए। और 826 घरों को आंशिक नुकशान हुआ। प्रदेश भर में 336 सड़कें यातायात के लिए ठप हो गई थी । लगभग पंद्रह सौ से ज्यादा ट्रांसफार्मर पूरी तरह से ठप हुए और सैकड़ो जल परियोजना बाधित हुई। 

हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला 
 चुनावी साल में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के तीन लाख से अधिक लोगों को बड़ी सौगात दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में गिरिपार के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने का निर्णय लिया। इससे चार विधानसभा क्षेत्रों की 154 पंचायतों के लोग लाभान्वित होंगे। हाटी समुदाय 14 जातियों व उप जातियों का समूह है। इसमें खश कनैत से लेकर अनुसूचित जाति व उपजातियां शामिल हैं। हाटी समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले लोगों की वर्षों से अटकी हुई मांग पूरी हुई। पूरे प्रदेश में हाटी समुदाय की जनसंख्या तीन लाख से अधिक है।
चुनाव की घोषणा 
 चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव लड़ने के लिए 25 अक्टूबर तक नामांकन पत्र भरे गए। प्रदेश में आचार संहिता लागू होते ही सरकारी घोषणाओं और नई भर्तियों पर भी रोक लग गई। अक्टूबर में चुनाव का ऐलान और प्रदेश में आचार संहिता की खबर देश और प्रदेश में सुर्खियां बनी।
हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की 68 में से 17 सीटें अनुसूचित जाति और तीन सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रही। इस चुनाव में हिमाचल में 55,74,793  मतदाता भाग लिया  । इनमें 55,07,261 सामान्य, 67,532 सर्विस वोटर मताधिकार का प्रयोग किए । कुल पुरुष मतदाता 28,46,201, महिला मतदाता 27,28,555 हैं। 18 प्लस उम्र वाले 43,173 मतदाता, दिव्यांग 56,001, थर्ड जेंडर 37 और 80 प्लस वाले 1.22 लाख मतदाता ने वोट किया। इस दौरान 1,184  ऐसे मतदाता भाग लिए जिनके उम्र सौ पार थी। मतदान करने के लिए प्रदेश में कुल 7,881 मतदान केंद्र बनाए गए। 

नवंबर नवंबर महीने की दूसरे हफ्ते में पूर्ण आचार संहिता लगते ही ढोल नगाड़ा चुनावी रैलियां बंद हुई 
12 नवंबर को हिमाचल की सभी 68 विधानसभा सीट पर एक चरण में मतदान हुआ . हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा क्षेत्रों के 412 प्रत्याशियों का भविष्य शनिवार को ईवीएम में कैद हो गया है। राज्य में लोकतंत्र के इस महायज्ञ में आहुति डालने के लिए मतदाता सुबह ही मतदान केंद्रों में पहुंच गए
चुनावी दंगल में भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), माकपा, बसपा और निर्दलियों समेत 412 प्रत्याशियों में यह रोचक जंग हुई है। इनमें 388 पुरुष और 24 महिला प्रत्याशी हैं। प्रदेश में कुल 55,92,828 मतदाताओं में से 28,54,945 पुरुष, 27,37,845 महिलाएं और 38 थर्ड जेंडर के नाम मतदाता सूचियों में शामिल रहे हैं। पहली बार 80 से अधिक उम्र और दिव्यांग वोटरों को अपने घरों से मत डालने की सुविधा दी गई है। इसके बावजूद कई बुजुर्गों और दिव्यांगों ने मतदान केंद्रों में पहुंचकर वोट डाला। मतदान के लिए 142 बूथ महिला और 37 दिव्यांग कर्मियों के हवाले रहे। प्रदेश भर में 136 आदर्श मतदान केंद्र भी बनाए गए थे। 378 अति संवेदनशील और 903 संवेदनशील मतदान केंद्र रहे।  
 
ड्रोन से सेब ढुलाई का सफल ट्रायल हुआ
12 नवंबर 2022 को हिमाचल के किन्नौर जिले में ड्रोन से सेब को एक स्थान से दूसरी जगह पहुंचाने का सफल ट्रायल किया गया। विग्रो और स्काई-वन कंपनी द्वारा किए गए ट्रायल में 20 किलो सेब की पेटी ‘कंडा’ (ऊंची चोटी) से निचार गांव तक सफलतापूर्वक पहुंचाई गई। पहाड़ों पर 9 किलोमीटर की दूरी तय करने में अमूमन 2 घंटे से ज्यादा वक्त लगता है। मगर, ड्रोन से 7 मिनट में सेब की पेटी ऊंचे पहाड़ से नीचे गांव तक पहुंचाई गई।
 
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में आए PM नरेंद्र मोदी
इतिहास में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। 5 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने कुल्लू दशहरे में कुल्लू घाटी के अधिष्ठाता देव रघुनाथजी की रथयात्रा में हाजिरी भरी और माथा टेककर आशीर्वाद लिया। देव समाज की ओर से प्रधानमंत्री को देवता का दुपट्टा और टोपी भेंट की गई। 300 साल से अधिक समय से चली आ रही दशहरा उत्सव मनाने की परंपरा के साक्षी पहली बार देश के कोई प्रधानमंत्री बने।
 

कुल्लू में बस हादसे में 13 की मौत हुई
4 जुलाई 2022 की सुबह कुल्लू जिला चीख पुकारों से दहल गया। सैंज घाटी के शैंशर क्षेत्र से अंजलि सूत नाम की निजी बस जंगला के पास 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई। बस में 15 लोग सवार थे, जिसमें से 13 लोगों की मौत हो गई। तुंग गांव के 4 लोगों की जान गई। नेपाल की एक मां-बेटी ने जान गंवाई।

इस हादसे ने आपदा प्रबंधन की भी पोल खोली, क्योंकि हादसाग्रस्त बस के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े लोगों के पास कोई ऐसा साधन नहीं था, जिससे उनको सुरक्षित बचाया जा सके

4 साल का बच्चा बना बौद्ध दोरजीडक मठ का धर्मगुरु
हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से निकलकर पूरी दुनिया में प्रसारित होने वाले बौद्ध धर्म के दोरजीडक मठ ने 4 साल के एक बालक को अपना चौथा धर्मगुरु माना। वर्ष 2015 में तीसरे धर्मगुरु तकलुंग चेतुल रिंपोछे का देहांत हो गया था। माना जाता है कि 3 साल बाद में उन्होंने ही 16 अप्रैल 2018 को लाहौल स्पीति के रंगरिक गांव में नवांग ताशी के रूप में पुनर्जन्म लिया। बौद्ध अनुयायियों को जब आध्यात्मिक तौर पर इसका पता चला तो उनके गुरुओं ने बालक के घर जाकर उनकी पहचान की।

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