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सेब के नही मिल रहे उचित दाम बागवान परेशान,आढ़ती बोले आने वाले दिनों में कश्मीर के सेब की दस्तक से दामों में आएगी और गिरावट 

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हिमाचल प्रदेश सेब बाहुल राज्य होने के कारण यहां की आर्थिकी को सुद्रढ़ करने के लिए सेब का अहम योगदान है। जिला शिमला की बात की जाए तो 80% सेब की पैदावार यहां से होती है। आंकड़ो की माने तो हिमाचल में इस बार सेब का कुल कारोबार छह हजार करोड़ रुपये पार होने के आसार हैं। हालांकि कारोबार बढ़ेगा और शुद्ध मुनाफा कम हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। उत्पादन लागत बढ़ने के साथ अब जहां सेब सीजन चरम सीमा पर है वहीं दामों में गिरावट आने से बागवान परेशान है। शिमला के भट्टाकुफ़्फ़र फल मंडी की बात की जाए तो बेहतर क्वालिटी का सेब लगभग 1800 रुपये बिका। वहीं बागवानों का कहना है कि आये दिन लागत बढ़ती जा रही है और उन्हें उचित दाम नही मिल रहे है।आढ़तियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कश्मीर से सेब की दस्तक के साथ ही दामों में और गिरावट आ सकती है।बाज़ार में गिरावट देखने को मिलेगी।
 
सेब बेचने आए  धर्म प्रकाश ने कहा कि वह 40 वर्ष बागवानी से जुड़े हैं और आये दिन खादों और कीटनाशकों के दामो में बढ़ोतरी हो रही है,एक पेटी में लगभग 500 रुपए खर्चा आता है। बड़ी कम्पनियां 75 रुपये सेब खरीद कर उसे 250 रुपये में बेचते हैं। सरकार का उस पर कोई चेक नही है। सरकार को चाहिए कि इस पर पूरा चेक रखे जिससे बागवानों को उनकी फसल का दाम मिल सके।कम्पनियों के प्रदेश में आने से बागवानों को कोई एतराज नही है लेकिन जो सेब के दाम तय होते है  उसके ऊपर सरकार का चेक न होना चिंता का विषय है। सेब के दामों में गिरावट इन बड़ी कम्पनियों के कारण आई है। बेहतर क्वालिटी का सेब मात्र 20% एक बागवान के पास होता है जबकि बाकी सेब बी और सी कैटेगरी का होता है जबकि लागत सारे माल पर एक सी लगती है जिससे बागवान को घाटा हो रहा है।अधिकतर बागवानों ने बैंकों से लोन लिया है और सेब के दाम उचित न मिलने से किश्त देना भी मुश्किल हो गया है। सरकार से मांग की, कि  रेगुलेटरी बॉडी बनाकर  प्राइवेट कंपनियों पर ध्यान रखा जाए। 
वहीं सेब बेचने आये अन्य बागवान ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें 1700 तक सेब के दाम मिलेंगे लेकिन वह मार्केट में आने पर निराश है क्योंकि उन्हें उम्मीदों के विपरीत दाम मिले है।

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