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फीफा वर्ल्ड कप 2022 : खून से सने स्टेडियमों में दुनिया का लोकप्रिय खेल 

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रंजीत  यादव / नेशन स्पीक्स 

बातें क़तर की, जहाँ मजदूरों के खून पर फीफा वर्ल्ड कप करवा रहा है, क़तर से भारत क्यों नाराज है, और क्यों बॉयकॉट क़तर ट्रेंड हो रहा है ।

 2022 के फीफा वर्ल्ड कप खाड़ी देश क़तर में खेला जा रहा है। क़तर के पांच शहरों में आठ स्टेडियमों में  20 नवंबर से 18 दिसंबर 2022 तक खेला जाएगा। फीफा की इतिहास जानने से पहले  2022 में  फीफा की 22वीं विश्व कप से जुड़ी विवादों पर एक नजर डालते हैं। क़तर में हो रहे फीफा विश्वकप शुरुवात होने से पहले ही विवादों में घिर चूका था। लेकिन आज हम बात करेंगे क्यों यूरोपियन फूटबाल  प्रेमियों ने इसे बैन करने की मांग कर रहें हैं  ।

पहले जानते हैं क़तर को कैसे मिला मेजबानी

यह बात 2010 की है। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में फीफा हेडक्वार्टर में हलचल तेज थी।  2018, 2022 और 2026 के मेजबानी के लिए मेजबान देशों का नाम अनाउंस होना था। 2018 रूस को मेजबानी मिली। और अब  निगाहें टिकी हुई थी 2022 पर। अमेरिका और मेक्सिको मेजबानी के लिए फेवरेट माना जा रहा था लेकिन जब मेजबान देश का नाम अनाउंस हुआ तो सब सन्न रह गए। क्योंकि जिस मेजबान का नाम घोषित किया गया था वो कभी फीफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पाया था। देश का नाम था क़तर जिसकी जनसँख्या मात्र तीस लाख है। उस समय के तत्कालीन फीफा परसिडेंट डैनी जॉर्डन पर आरोप लगा की उन्होंने मोटे रकम लेकर क़तर का नाम पर मुहर लगाया। हालांकि भ्रष्टाचार में घिरे जाने पर डैनी ने इस्तीफा दे दिया।

क़तर जासूसी में भी इन्वॉल्व 

क़तर पर ऐ भी आरोप लगा कि मेजबानी हासिल करने और उसे बनाये रखने के लिये विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा के अधिकारियों की जासूसी करने में अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग सीआईए के एक पूर्व अधिकारी की मदद ली। एसोसिएटेड प्रेस की एक जांच में इसका खुलासा हुआ और पता चला की कि कतर ने मेजबानी की दौड़ में शामिल अन्य देशों और 2010 में मेजबान का चयन करने वाले प्रमुख फुटबॉल अधिकारियों की जासूसी करने के लिये सीआईए के पूर्व अधिकारी केविन चाल्कर की सेवाएं ली थी। चाल्कर ने फुटबॉल जगत में देश के आलोचकों पर नजर रखने के लिये क़तर का सहयोग किया। चाल्कर ने क़तर को मेजबानी मिलने के बाद भी कई वर्षों तक कतर के लिये काम किया।  एपी की में जांच चाल्कर के पूर्व सहयोगियों से बातचीत के अलावा विभिन्न ठेकों, खरीदारी के बिलों, ईमेल और व्यावसायिक दस्तावेजों की समीक्षा पर आधारित थी जो क़तर के काले करतूतों का सबूत था की कैसे क़तर ने वर्ल्ड कप मेजबानी के लिए अपने पैसों  के बल पर अपने नाम किया था। ऐ थी मेजबानी की बात।

 अप्रवासी मजदूरों की खून से लथपथ स्टेडियमों पर क़तर मैच करा रहा है। 

क़तर को मेजबानी मिलने के बाद क़तर ने नए सात अंतरास्ट्रीय स्टेडियम और वर्ल्ड कप से संबधित कई परियोजनावों पर दिन रात कार्य किया। फीफा के इतिहास में अभी तक का सबसे महंगा वर्ल्ड कप माना जा रहा है। क़तर ने विश्व कप को सफल बनाने के लिए लगभग २२० बिलियन डॉलर खर्च किया है। इसे रुपए में देखें तो करीब Rs 17,91,515 करोड़  बनता  है।  कई देशो की अर्थव्यस्था को जोड़ दे भी तो उससे ज्यादा हो जाता है।

लेकिन इसे जुड़ी भयावह घटना को जानकर आपका दिल सिहर जायेगा। जो आप टीवी पर  क़तर के चमक धमक से सुशोभित स्टेडियम ,एयरपोर्ट ,सड़कें और नए- नए शहरों की हाई रेज बिल्डिंग  देख रहे हैं वो सब प्रवासी मजदूरों की खून से सनी हुई है। ‘द गार्डियन’ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक,कतर में पिछले 10 सालों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के 6500 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों की मौत हुई है। इन मजदूरों की मौत विषम परिस्थिति में हुई।  कड़ी गर्मी में लगातार काम करने से इन मजदूरों की मौत हुई है। मानव अधिकारों को ताक पर रखकर क़तर ने प्रवासी मजदूरों से जबरन कार्य करवाया। मरने वाले मजदूर अपने घर और परिवार को अच्छी ज़िदगी के लिए अप्रवास का रूख किए थे। लेकिन वे प्रवासी बनकर रह गए। इनमे से कोई परिवार के इकलौते थे,तो कोई नए शादी शुदा जो कभी लौट कर वापस नही आए । ऐ है क़तर में हो रहे  फूटबाल विश्वकप का  कड़वा सच जो सुनकर,और जानकार रूहें  काँप जाती है।

लेकिन जिन देशों से इन मजदूरों का वास्ता था वे सभी देश चुपी साधे हुए हैं। लेकिन यूरोप के फूटबाल प्रेमी इसे बड़े जोरों से उठा रहे हैं। बॉयकॉट ट्रेंड करा रहे है। यूरोप में हो रहे है क्लब  मैचों में बैन क़तर का पोस्टर और तख्तियां दिखती है। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के देश चुपी साधे हुए हैं। भारत में अब बॉयकॉट क़तर ट्रेंड हो रहा है जिसका लिंक फीफा वर्ल्ड कप नहीं  बल्कि भगोड़ा जाकिर नाईक से है और भारत ने क़तर के सामने आपने नाराजगी व्यक्त की है।

भारत की नाराजगी 

फीफा वर्ल्ड कप 2022 देखने के लिए बड़ी-बड़ी हस्तियों समेत दुनियाभर के लोग पहुचें । ओपनिंग सेरेमनी में भारत से उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ उपस्थित रहे। इस बीच,खबर सामने आई है कि फीफा वर्ल्ड कप 2022 की ओपनिंग सेरेमनी में भगोड़ा जाकिर नाइक को निमंत्रण मिला है और उसे कतर की राजधानी दोहा में देखा गया।  जाकिर नाइक के फीफा वर्ल्ड कप 2022 के लिए कतर पहुंचने पर भारत ने नाराजगी जताई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसके लिए कतर सरकार के सामने ये मामला उठाया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान जारी करते हुए कहा कि कतर सरकार के सामने जाकिर नाइक का मुद्दा उठाया है। भगोड़े जाकिर नाइक को भारत लाने की पूरी कोशिश की जा रही है। जाकिर नाइक को भारत लाकर उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दे कि   जाकिर नाईक UEFA  के तहत कई धाराओं में उसके खिलाफ केस दर्ज है। देश में दंगा फ़ैलाने से लेकर धर्मांतरण कराने में उनका नाम आता है। अपने पीस टीवी के माध्यम से कड़वाहट फ़ैलाने में भी उनका नाम है। भारत सरकार सहित अमेरिका ,इंग्लैंड कनाडा सहित कई देशों ने इनके चैनल को प्रतिबंधित कर दिया। भारत से फरार होने के बाद जाकिर नाइक मलेशिया में स्थायी नागरिकता ले लिया। भारत ने मलेशिया के सामने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग उठा चुकी है।और कतर सरकार के सामने भी ये मुद्दा लाया गया। वहीं भारत के एक्सटर्नल अफेयर्स के प्रवक्ता अरिन्दम बागची ने कहा की भगोड़े जाकिर नाइक को भारत लाने और उसे सजा दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाते रहेंगे।

वहीं, कतर सरकार ने जाकिर नाइक के फीफा वर्ल्ड कप 2022 की ओपनिंग सेरेमनी के मौके पर दोहा पहुंचने पर सफाई जारी की है. कतर सरकार का कहना है कि जाकिर नाइक को कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया है. कतर सरकार ने अपने डिप्लोमेटिक चैनलों के माध्यम से कहा कि भारत और उसके रिश्तों में दरार डालने के लिए दूसरे देशों की तरफ से जानबूझकर ऐसी झूठी खबरें चलाई जा रही हैं।

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