Nation Speaks

Ab Bolega Hindustan

पहली बार इंडिया के लिए खेल रहे कुलदीप सेन के पिता मैच देख नहीं पाए ,ग्राहकों के बाल काटते रह गए 

1 min read
रविवार को खेले गए भारत और बांग्लादेश के बीच पहला मैच भारत को हार झेलनी पड़ी। बांग्लादेश की टीम इस लो स्कोरिंग मैच को अंतिम ओवर तक ले गए। इस लो-स्कोरिंग मुकाबले में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। भारत की पारी 41.2 ओवर में 186 रन के स्कोर पर सिमट गई। केएल राहुल ने सबसे ज्यादा 73 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम ने 46वें ओवर में नौ विकेट पर जीत के लिए जरूरी रन बना डाले।
बांग्लादेश की जीत के हीरो मेहदी हसन मिराज और मुश्तफिजुर रहमान रहे। जिन्होंने आखिरी विकेट के लिए 54 रनों की साझेदारी की। मेहदी हसन ने चौके के साथ जीत दिलाई। टीम ने 136 के स्कोर पर 9वां विकेट गंवाया था। उसके कप्तान लिटन दास ने सबसे ज्यादा 41 रन बनाए।
कुलदीप सेन का डेब्यू 
भारतीय टीम से डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज कुलदीप सेन की कहानी बहुत रोचक है। उन्होंने एक गरीब परिवार से निकलकर टीम इंडिया में जगह बनाई है। अपने डेब्यू मैच में दो विकेट लिए। लेकिन उनके पिताजी अपने बेटे को डेब्यू करते हुए देख नहीं पाए।
कुलदीप सेन के पिता एक नाई हैं। वे मध्य प्रदेश के रीवा शहर में अपना छोटे से सैलून चलाते हैं। रविवार को एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि बेटे का मैच देखें ? उनका उत्तर पत्रकार को हैरत में डाल दिया। उन्होंने कहा कि दुकान पर टीवी नहीं है। और आज रविवार है इसलिए ग्राहक भी ज्यादा आते हैं  इसलिए दुकान भी बंद नहीं कर सकते हैं। घर जाकर बच्चों से पूछेंगे मैच के बारे में। 
वहीं कुलदीप के घर पर उनके भाई और बहन मैच देख रहे थे। उनके भाई ने अपने दोस्तों को घर पर बुलाकर सबके साथ मैच देखा। सबके निगाहे कुलदीप पर टिकी हुई थी भाई कब पहला स्पेल डालेगा। सबने मैच को आखिरी बॉल तक देखा। कुलदीप इस मैच में  सात ओवर डाले और दो विकेट झटके।  
 
गरीबी और क्रिकेट  
कुलदीप सेन की इस सफर बहुत कठनाई से भरी हुई है। गरीबी और खेल दोनों का मेल खिलाडियों को तोड़ देती है। कुलदीप सेन भी गरीब घर से निकलकर आज चमक बिखेर रहे हैं। उनके कोच  एरियल एंट्रोनी बताते हैं कि  कुलदीप लॉक डाउन के दौरान क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिए थे। लॉक डाउन की वजह से परिवार का आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। और कुलदीप अपने परिवार को मदद के लिए क्रिकेट छोड़ना चाहते थे। 
 
क्रिकेट खेलने के लिए किराये नहीं होता था 
 
बताया जाता है कि  कुलदीप सेन बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक़ीन थे। और कहीं मैच खेलने जाना होता था तो वे दूसरे के उप्पर निर्भर होते। जब उनके डिस्ट्रिक्ट लेवल में सिलेक्शन हुई और मैच खेलने कहीं दूर जाना था तब भी उनके पास किराए का पैसा नहीं था। माँ से  500  मांगने पर उनकी माँ ने पिताजी को कह दी हालांकि उनके पिता जी ने पैसे तो दे दिए लेकिन साथ में क्रिकेट छोड़ने का सलाह भी दे दिया था। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2022 | Newsphere by AF themes.
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)