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नई सरकार में सिर्फ दो विधायकों के पास डॉक्टरेट की उपाधि,नौ सिर्फ दसवीं पास और सात एमएलए 12वीं पास

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चुनकर आए 68 विधायकों में नौ विधायक सिर्फ दसवीं पास हैं, जबकि डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले सिर्फ दो ही विधायक हैं। एसोएिसशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की रिपोर्ट के मुताबिक नवनिर्वाचित विधायकों में डॉक्टरेट की उपाधि यानी पीएचडी वाले सिर्फ दो ही विधायक हैं। इनमें सोलन विधानसभा क्षेत्र से सबसे उम्रदराज विधायक कर्नल डा. धनीराम शांडिल पीएचडी डिग्री धारक हैं। उन्होंने एचपीयू से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा चुराह विधानसभा से डा. हंसराज के पास भी पीएचडी की डिग्री हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल की हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 15 विधायक हैं, जिन्होंने कॉलेज की पढ़ाई भी नहीं की हैं। इनमें से नौ विधायक सिर्फ दसवीं तक ही पढ़े हैं, जबकि सात विधायक दसवीं पास हैं। दसवीं पास विधायकों में बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र से किशोरी लाल हैं। उन्होंने 1963 में पंजाब यूनिवर्सिटी से दसवीं की पढ़ाई की थी। कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों के अंतराल से जीत पवन काजल भी दसवीं पास हैं। इसके अलावा दरंग विधानसभा क्षेत्र से पूर्ण चंद भी दसवीं पास हैं। बल्ह विधानसभा क्षेत्र से आईजी गांधी ने भी दसवीं तक पढ़ाई की हैं, हालांकि इसके बाद इन्होंने आईटीआई शाहपुर से सर्वेयर का डिप्लोमा किया हैं। वहीं सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र से दलीप ठाकुर और जोगिंद्रनगर से प्रकाश प्रेम कुमार सहित कुछ अन्य विधायक भी दसवीं पास हैं।

 

हालांकि प्रदेश में 50 के करीब विधायक ऐसे चुनकर आए हैं, जिनकी शैक्षणिक योग्याता ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इनमें से ज्यादातर विधायक पॉलिटिक्ल साइंस में बीए व एमए पास हैं। वहीं, कई विधायक पेश से वकील भी हैं। डाक्टरों के पेशे से सिर्फ एक ही विधायक है। यह भरमौर विधानसभा क्षेत्र से जीत आईजीएमसी के पूर्व एमएस डा. जनकराज है।

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