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कांगड़ा में रुरल टूरिज्म रोड़ विकसित करने की कवायद तेज

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जिला कांगड़ा में मुख्यत: धर्मशाला और पालमपुर को ही टूरिस्ट डेस्टीनेशन के रूप में देखा जाता है। अब जिला कांगड़ा में रुरल टूरिज्म रोड़ विकसित करने की कवायद भी तेज हो गई है। गगल से नगरोटा सूरियां और हरिपुर गुलेर तक सड़क मार्ग में व्यापक सुविधाएं न होने के चलते इन क्षेत्रों में रुरल टूरिज्म नजरअंदाज हो रहा है, जिसे मुख्य धारा में लाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास आरंभ किए हैं। जिसके तहत गगल से नगरोटा सूरियां, हरिपुर-गुलेर तक के 46 किलोमीटर लंबे रोड़ को रुरल टूरिज्म रोड़ के रूप में विकसित किया जाएगा। जिसके तहत जहां इस रोड़ पर सुविधाएं जुटाई जाएंगी, वहीं रेन शेल्टर भी बनाए जाएंगे। यही नहीं इस मार्ग पर ऐतिहासिक भवनों को भी रेनोवेट किया जाएगा। इस मार्ग पर मसरुर टेंपल भी आता है, वहीं हरिपुर-गुलेर जो कि कांगड़ा कला के लिए विख्यात है, उसे भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में प्रशासन की पहल पर काम होगा। जिसको लेकर सरकार को प्रपोजल भी भेजा गया था।
जानकारी के अनुसार योजना के तहत जो भी कार्य होना है, उसको लेकर संबंधित लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन द्वारा डीपीआर तैयार की जा रही है। इन डीपीआर के 25 से 30 जुलाई तक जिला प्रशासन के पास पहुंचेंगी। जिसे फाइनल करके बजट प्रावधान हेतू सरकार को भेजा जाएगा। गगल -नगरोटा सूरियां-हरिपुर-गुलेर रोड़ पर स्थित गांवों व ऐतिहासिक भवनों के प्रति पर्यटक आकर्षित हों, उसी के अनुरूप प्रपोजल तैयार की गई है। जिला प्रशासन के प्रयास सफल होते हैं तो निश्चित तौर पर आगामी वर्षों में नगरोटा सूरियां, पौंग बांध, मसरुर टेंपल व हरिपुर-गुलेर में भी पर्यटकों की आमद में इजाफा होगा।
गगल-नगरोटा सूरियां-हरिपुर गुलेर के 46 किलोमीटर लंबे रोड़ को रुरल टूरिज्म रोड़ के रूप में विकसित करने की प्रपोजल है। इसके तहत कई कार्य होने हैं, जिसको लेकर संबंधित क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन डीपीआर तैयार कर रहे हैं। डीपीआर इसी माह के अंतिम सप्ताह में जिला प्रशासन के पहुंचेगी, जिसे फाइनल करके बजट प्रावधान हेतू प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।

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