नई सरकार, सख्त फैसले और देनदारी

आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया, यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी और यह कहावत फ़िलहाल हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को परिभाषित भी करती है । हिमाचल प्रदेश में फिलहाल खर्चे ज्यादा हैं और आमदनी कम, जिससे हिमाचल प्रदेश का वित्तीय बोझ साल दर साल बढ़ता रहा है । हर आती-जाती सरकार ने हिमाचल के विकास की गाड़ी को पटरी पर रखने के लिए ऋण (लोन) का सहारा लिया है । अब आलम यह है कि हिमाचल प्रदेश पर कई हज़ार करोड़ रूपए की देनदारी है इस देनदारी के साथ साथ हिमाचल में विभिन्न कर्मचारी वर्ग की देनदारी भी राज्य कोष पर बोझ को बढ़ा रही है । पक्ष और विपक्ष के इस वित्तीय स्थिति पर आरोप प्रत्यारोप के बीच अब बढ़ते वित्तीय बोझ की स्थिति से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री बने सुखविंदर सिंह सुक्खू की नई सरकार ने कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं ।

हिमाचल की कांग्रेस सरकार वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के अपने इरादे की शुरुआत में ही स्पष्ट कर चुकी है और स्वयं मुख्यमंत्री के कई बार सख्त फैसलों के संकेतो के बाद अब उन इरादों को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो गया है बीते कुछ दिनों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए है तो चलिए एक नज़र उन सभी फसलों पर डालते हैं

  1. शिमला आएंगे तो ग्रीन टैक्स का भुगतान जरूरी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला आने वाले सैलानियों का सफर अब मंहगा कर दिया गया है । नगर निगम टूरिस्ट गाड़ियों से ग्रीन टैक्स वसूलेगा । छोटी गाड़ियों से 200 रुपए, इनोवा से 300 और बस, ट्रक व बड़े वाहनों से 500 रुपए की वसूली होगी। आय बढ़ाने की योजनाओं में यह योजना कारगार साबित होगी, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में हर साल 2 से 3 करोड़ टूरिस्ट आते हैं। जिसका मतलब है कि इस फीस से नगर निगम और सरकार को सलाना करोड़ों रुपए मिलेंगे, सरकार से मंजूरी मिलते ही अप्रैल महीने में यह फीस सैलानियों के लिए शुरू हो जाएगी । आपको बता दे कि इससे पहले नगर निगम द्वारा 2013 में भी ग्रीन टैक्स लगाया गया था, लेकिन किसी कारण उसे बंद कर दिया गया। शिमला से पहले मनाली में बाहरी राज्यों के वाहनों की एंट्री पर ग्रीन फीस की वसूली की जा रही है। यहां वाहनों में लगे फास्टैग से फीस ली जा रही है।

2. लंबित मामलों को निपटाने के लिए टैक्स डिफॉल्टरों को राहत

प्रदेश में 2017 से पहले के टैक्स डिफॉल्टरों को सुक्खू सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने ऐसे करीब 50 हजार टैक्स डिफॉल्टरों को लंबित टैक्स का भुगतान करने का मौका दिया है। इसके लिए सद्भावना विरासत मामले समाधान योजना 2023’ लागू की गई है। यह योजना अगले 3 महीने तक लागू रहेगी। इस योजना का मकसद टैक्स डिफॉल्टर्स से बकाया राशि को वसूलना है। योजना के तहत छोटे और मध्यम व्यापारियों से टैक्स 10% प्रोसेस फीस के साथ वसूला जाएगा। इसमें टैक्स डिफॉल्टरों को सिर्फ प्रिंसिपल अमाउंट चुकता करना होगा। GST कानून के लागू होने से पहले के टैक्स डिफॉल्टरों के लिए यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के शुरू होने से ब्याज और जुर्माने की पूरी छूट होगी। आपको बता दे कि इससे पहले भी वर्ष 2019 में एक लीगेसी योजना शुरू की थी, जिसके माध्यम से 14,814 मामलों का निपटारा करके विभाग ने 393 करोड़ रुपए कमाए थे।

3. टोल बैरियर की नीलामी

हिमाचल की सुक्खू सरकार के लिए टोल बैरियर आय का एक अच्छा जरिया बनेंगे। इसलिए 3 मार्च को मंत्रिमंडल की बैठक में टोल बैरियर की नीलामी को मंजूरी दी गई और आबकारी विभाग में इसका रिजर्व प्राइस तय हुआ । कुल 7 जगहों पर 11 टोल बेरियर नीलाम होंगे । वहीं टोल की नीलामी से विभाग को 120 करोड़ रुपए से ज्यादा की आय होने की उम्मीद है। सरकार चाहती है कि प्रदेश में आय के संसाधन बढ़ें, इसलिए इस बार टोल नाकों का रिजर्व प्राइज बढ़ाया गया है। टेंडर कम ऑक्शन के माध्यम से इनको दिया जाएगा। सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइज ऊना के मेहतपुर और गगरेट टोल बैरियर के लिए रखा गया है।

4. मंडियों में ई-लाइसेंस अनिवार्य

हिमाचल प्रदेश की मंडियों में काम करने वाले कमीशन एजेंट (आढ़ती) अब टैक्स की चोरी नहीं कर पाएंगे। स्टेट मार्केटिंग बोर्ड ने टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-लाइसेंस अनिवार्य कर दिए हैं। ई-लाइसेंस के साथ-साथ रिटर्न भी ऑनलाइन भरने की व्यवस्था कर दी गई है। वर्तमान में कई कमीशन एजेंट आधा कारोबार शो करके कृषि उपज विपणन समिति (APMC) को चूना लगाते हैं। एपीएमसी अधिकारियों की मानें तो कुछ कमीशन एजेंट यदि मासिक 10 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं तो वह 6 से 8 करोड़ रुपए का ही कारोबार शो करते हैं। ऐसा करने से जहां एपीएमसी को 10 लाख की आय होनी चाहिए, वह घटकर 6 से 8 लाख ही रह जाती है।

5. निशुल्क स्मार्ट वर्दी बंद

हिमाचल प्रदेश के करीब पांच लाख विद्यार्थियों को अब निशुल्क स्मार्ट वर्दी नहीं मिलेगी। आर्थिक तंगी से गुजर रही सुक्खू सरकार ने सामान्य श्रेणी के पहली से बारहवीं कक्षा के लड़कों और नौवीं से बारहवीं कक्षा की लड़कियों को निशुल्क वर्दी योजना के दायरे से बाहर कर दिया है। पहले 8.50 विद्यार्थियों को दी जा रही यह सुविधा अब 3.70 लाख विद्यार्थियों तक ही सीमित कर दी गई है पहले विद्यार्थियों को वर्दी के दो- सेट और सिलाई के 200 रुपये दिए जाते थे। लेकिन अब वर्दी और सिलाई राशि के स्थान पर 600 रूपए की राशि दी जाएगी।

6. नई शराब नीति

सूबे में एक अप्रैल 2023 से शराब महंगी हो जाएगी । प्रदेश की सुक्खू सरकार ने पांच साल बाद दोबारा से शराब ठेकों की नीलामी करने का फैसला लिया है। ऐसे में सरकार अब 15 से 20 फीसदी अधिक कीमत पर शराब ठेकों को नीलाम करेगी। प्रति बोतल आठ से दस रुपये मिल्क सेस लगाने का फैसला भी लिया गया है । मिल्क सेस से होने वाली राशि को गाय-भैंस पालकों से हर दिन दस लीटर दूध खरीदने की योजना पर खर्च किया जाएगा । वहीं, सरकार ने शराब की प्रति बोतल पर लग रहा दो से 4 रुपये के कोविड सेस को भी खत्म कर दिया है । हालांकि, काऊ सेस को जारी रखा है.

वर्ष 2023-24 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दी गई है । वर्ष 2023-24 के लिये राज्य में खुदरा आबकारी दुकानों की नीलामी एवं निविदा को स्वीकृति प्रदान की गयी है । इसका उद्देश्य सरकार के राजस्व में पर्याप्त वृद्धि, शराब के मूल्य में कमी और पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी पर अंकुश लगाना है । नई पॉलिसी से सरकार को 2,357 करोड़ रुपये का राजस्व होने का अनुमान है.

इन सभी फैसलों से जो बात जाहिर होती है वो यह कि सरकार की ओर से दिए जा रहे सख्त फैसलों के संकेत मात्र अंकित नहीं थे आने वाले दिनों में इसी तरह के कई फैसले प्रदेश में देखने को मिल सकते है जिसके लिए प्रदेश वासियों को तैयार रहना है आने वाले दिनों में बजट सत्र की तैयारी भी जोरों पर मुख्यमंत्री का पहला बजट होने के नाते हुए वित्तीय संसाधन बढ़ाए जाने की सोच के साथ इस बजट सत्र को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।

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