जिला बिलासपुर के मलेटा गांव के निवासी रामपाल ने अपने खेतों में उगाई तीन फीट लंबी और 5 किलोग्राम की मूली. जी हां आजकल के इस दौर में हिमाचल प्रदेश के किसान भी अपनी खेती से लोगों को काफी प्रभावित कर रहे हैं ऑर्गेनिक खेती के द्वारा सब्जियों को उगाकर नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं .
ऐसा ही एक मामला जिला बिलासपुर के मेलटा गांव का है जिसमे किसान राम पाल ने अपने खेतों में ऑर्गेनिक खेती की हैं और उसके खेतों मैं 3फीट लंबी और 5किलो ग्राम की मुली पैदा कर दी हैं. रामपाल ने बताया की इसकी पैदावार के लिए उसने कोई भी यूरिया खाद का प्रयोग नही किया और ऑर्गेनिक खेती से की हैं
ऑर्गेनिक फार्मिंग
जैविक खेती में किसी भी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है. इसमें खाद और कीटनाशक भी ऑर्गेनिक ही इस्तेमाल किए जाते हैं, ना कि कैमिल वाले. कैमिकल्स की वजह से एक तो जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है, वहीं सब्जियों-फलों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है. इन कैमिकल्स को धीमा जहर भी कहा जाता है.
भारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है अधिक उत्पादन के लिये खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरको एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है जिससे सीमान्य व छोटे कृषक के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही है और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है साथ ही खाद्य पदार्थ भी जहरीले हो रहे हैं।
इसलिए इस प्रकार की उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिये गत वर्षों से निरन्तर टिकाऊ खेती के सिद्धान्त पर खेती करने की सिफारिश की गई, जिसे प्रदेश के कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए, बढ़ावा दिया जिसे हम जैविक खेती प्रचार-प्रसार कर रही है