मनरेगा के तहत केंद्र सरकार से मंजूर हुए 18 करोड़, तीन महीने से पगार के इंतजार में एक हजार कर्मचारी

जिला परिषद कमियों के अलावा ग्राम रोजगार सेवक भी ग्रामीण विकास विभाग में मर्जर की मांग कर रहे है। उन्होंने मांग उठाई है कि ग्रामीण विकास विभाग में खाली पड़े पदों पर मर्जर किया जाए। इस सैलरी की दिक्कत दूर होगी, वहीं अन्य लाभों के लिए भी वे पात्र हो जाएंगे। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इन्हें अभी तक न तो कोई मेडिकल लाभ मिलते हैं न ही ओपीएस का प्रावधान इनके लिए है। करूणामूलक नौकरी के लिए इनके आश्रित भी पात्र नहीं है।

पंचायतों में मनरेगा के तहत काम कर रहे ग्राम रोजगार सेवकों को शीघ्र वेतन मिलेगा। मनरेगा के तहत केंद्र से 18 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हो गई है। ऐसे में इन कर्मचारियों अति शीघ्र वेतन प्रदान किया जाएगा। लगभग तीन महीने से प्रदेश की पंचायतों में करीब एक हजार ग्राम रोजगार सेवक काम कर रहे हैं। बता दे की इन ग्राम रोजगार सेवकों की तैनाती मनरेगा कार्य के लिए की गई है। ऐसे में इन कर्मचारियों को वेतन भी मनरेगा के तहत आने वाली राशि से प्रदान किया जाता है। पिछले काफी समय से हिमाचल को मनरेगा की ग्रांट नहीं मिली थी।

अब 18 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत

इसके कारण इन ग्राम रोजगार सेवकों को वेतन नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में अब 18 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत होने से जल्द ही ग्राम रोजगार सेवकों को वेतन प्रदान किया जाएगा। ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज का कहना है कि मनरेगा की ग्रांट नहीं आने से हर बार ग्राम रोजगार सेवकों को दो से तीन महीने इंतजार करना पड़ता है। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से मांग उठाई है कि ग्राम रोजगार सेवकों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक रिवालविंग फंड तैयार किया जाना चाहिए, ताकि जब मनरेगा की ग्रांट नहीं आती है, तो तब रिवालविंग फंड से ग्राम रोजगार सेवकों को दो से तीन महीने का वेतन प्रदान किया जाए।

ग्रामीण विकास विभाग में मर्जर की मांग

जिला परिषद कमियों के अलावा ग्राम रोजगार सेवक भी ग्रामीण विकास विभाग में मर्जर की मांग कर रहे है। उन्होंने मांग उठाई है कि ग्रामीण विकास विभाग में खाली पड़े पदों पर मर्जर किया जाए। इस सैलरी की दिक्कत दूर होगी, वहीं अन्य लाभों के लिए भी वे पात्र हो जाएंगे। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इन्हें अभी तक न तो कोई मेडिकल लाभ मिलते हैं न ही ओपीएस का प्रावधान इनके लिए है। करूणामूलक नौकरी के लिए इनके आश्रित भी पात्र नहीं है।

चल रहे मनरेगा के काम

ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में मनरेगा के तहत विकास कार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं। प्रदेश में आई भयानक आपदा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीण क्ष्ेात्रों में नुकसान की भरपाई के लिए मनरेगा के तहत डंगे लगाने व खेतों को ठीक करने का काम मनरेगा के तहत किया जा रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मनरेगा के तहत काफी हद तक काम कर लिया गया हैं, जबकि बाकी कार्य प्रगति पर है।

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