New chapter in air services: Flights will start soon from Sanjauli and Rampur heliports
शिमला: राजधानी शिमला के संजौली में बने हिमाचल प्रदेश के पहले हेलीपोर्ट से जल्द ही नियमित हेलिकॉप्टर उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने संजौली और रामपुर उपमंडल के हेलीपोर्ट संचालन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग को संचालन का लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है।
यह उड़ानें भारत सरकार की उड़ान-2 योजना के अंतर्गत संचालित की जाएंगी, जिसका उद्देश्य है क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाना और पर्यटन को बढ़ावा देना।
तीन साल बाद मिली बड़ी मंजूरी
संजौली हेलीपोर्ट का निर्माण अप्रैल 2018 में शुरू हुआ था और 3 जनवरी 2021 को यहां पहली सफल लैंडिंग हुई थी। वर्ष 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसका उद्घाटन किया था। लेकिन संचालन शुरू करने के लिए DGCA की अंतिम मंजूरी का इंतजार चल रहा था, जो अब जाकर पूरी हुई है।
DGCA की तरफ से इससे पहले कई बार तकनीकी और संचालन से जुड़ी आपत्तियां जताई गई थीं। अब तीन साल बाद आखिरकार सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और हेलीपोर्ट का औपचारिक संचालन शुरू होने को तैयार है।
रात में लैंडिंग की सुविधा, इमरजेंसी में एयरलिफ्ट संभव
संजौली हेलीपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि यहां रात्रि लैंडिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसका मतलब यह है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को PGI चंडीगढ़ या AIIMS जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में एयरलिफ्ट किया जा सकेगा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर भी अब इसी हेलीपोर्ट से उड़ान भरेगा, जिससे वीवीआईपी मूवमेंट भी अब और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
पर्यटन और हवाई सेवाओं को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा
पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक विवेक भाटिया ने जानकारी दी कि DGCA से मंजूरी मिलने के बाद अब विभाग विमानन कंपनियों की सेवाएं, स्टाफ की तैनाती, और उड़ानों के शेड्यूल पर काम कर रहा है।
संजौली और रामपुर हेलीपोर्ट के संचालन से:
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प्रदेश में हवाई संपर्क मजबूत होगा
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पर्यटन को सीधा फायदा मिलेगा
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स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
अब नहीं जाना होगा जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट
अब तक शिमला आने वाले सैलानियों को 30 किलोमीटर दूर जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट उतरना पड़ता था और वहां से टैक्सी से शिमला शहर तक आने में करीब डेढ़ घंटे लग जाते थे।
लेकिन संजौली हेलीपोर्ट से उड़ानें शुरू होने के बाद यात्री सीधे शिमला शहर पहुंच सकेंगे, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।
