वेंकटेश्वर मंदिर, जहां होती हैं कई अविश्वसनीय घटनाएं

भारत के रहस्यमयी वेंकटेश्वर मंदिर, जहां होती हैं कई अविश्वसनीय घटनाएं

दुनिया भर में भारत अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में 64 करोड़ देवी-देवता वास करते है भारत देश के अंदर आपको विभिन्न देवी देवताओं के मंदिर देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें अपनी संस्कृति, मान्यताओं या सिद्धि की वजह से जाना जाता है। भारत में ऐसे भी कई रहस्यमय मंदिर हैं, जो अपने देवी देवताओं के कारण, भूत-प्रेत संस्कार के कारण या हजारों वर्ष पुराने मंदिरों के लिए जाने जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने रहस्यमय कारणों के लिए प्रसिद्ध हैं। तो चलिए फिर आपको उस मंदिर की जानकारी देते हैं. उस मंदिर का नाम वेंकटेश्वर मंदिर है और यह मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमला में स्थित है ।

वेंकटेश्वर मंदिर को समर्पित

यह मंदिर विष्णु जी के एक रूप वेंकटेश्वर को समर्पित है, जिनके बारे में ये मान्यता है कि वे मानव जाति को कलियुग में होने वाली परीक्षाओं और परेशानियों से बचाने के लिए पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। इसलिए इस स्थान का एक नाम कलियुग वैकुंठ भी पड़ा है इस मंदिर को तिरुमाला मंदिर, तिरुपती मंदिर और तिरूपति बालाजी मंदिर जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। वेंकटेश्वर को कई अन्य नामों से जाना जाता है बालाजी, गोविंदा और श्रीनिवास।

वेंकटेश्वर मंदिर (टीटीडी) द्वारा चलाया

मंदिर तिरुमला तिरुपती देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा चलाया जाता है, जो आंध्र प्रदेश सरकार के नियंत्रण में है। तिरुपति के इतिहास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि 5वीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका था। कहा जाता है कि चोल, होयसल और विजयनगर के राजाओं का आर्थिक रूप से इस मंदिर के निर्माण में खास योगदान था।

अनुश्रुतियां

इस मंदिर के विषय में एक अनुश्रुति इस प्रकार से है। प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु अवतार ही है। ऐसा माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक सरोवर के किनारे निवास किया था। यह सरोवर तिरुमाला के पास स्थित है। तिरुमाला- तिरुपति के चारों ओर स्थित पहाड़ियाँ, शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनीं ‘सप्तगिर‍ि’ कहलाती हैं। श्री वेंकटेश्वरैया का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर स्थित है, जो वेंकटाद्री नाम से प्रसिद्ध है।

सातवीं पहाड़ी

वहीं एक दूसरी अनुश्रुति के अनुसार, 11वीं शताब्दी में संत रामानुज ने तिरुपति की इस सातवीं पहाड़ी पर चढ़ कर गये थे। प्रभु श्रीनिवास (वेंकटेश्वर का दूसरा नाम) उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। ऐसा माना जाता है कि प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात वे 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे और जगह-जगह घूमकर वेंकटेश्वर भगवान की ख्याति फैलाई।

जानें उनके आश्चर्यजनक तथ्य…

  1. मुख्यद्वार के दाएं बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई।
  2. भगवान बालाजी के सिर पर रेशमी केश हैं, और उनमें गुत्थिया नहीं आती और वह हमेशा ताजा रहेते है।
  3. 3. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।
  4. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं लेकिन, वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है।
  5. बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।
  6. गृभगृह में चढ़ाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है।
  7. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है।
  8. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है।
  9.  बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं।
  10.  गर्भगृह मे जलने वाले दिपक कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है।

वेंकटेश्वर मंदिर की चढ़ाई

तिरुमलापर पर्वतमाला पैदल यात्रियों हेतु पहाड़ी पर चढ़ने के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम नामक एक विशेष मार्ग बनाया गया है। इसके द्वारा प्रभु तक पहुँचने की चाह की पूर्ति होती है। साथ ही अलिपिरी से तिरुमाला के लिए भी एक मार्ग है। आपको बता दें, इस मंदिर में दो विशाल हॉल हैं, जहां रोजाना 1200 से अधिक तीर्थ यात्रियों के बाल कटते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि यहां सालभर में लगभग 75 टन तक बाल पहुंच जाते हैं। इन बालों को बेचकर तिरुपति मंदिर की 6.5 मिलियन से अधिक कमाई होती है।

अन्य आकर्षण

तिरुचनू श्री पद्मावती समोवर मंदिरर (इसे अलमेलुमंगपुरम भी कहते हैं) तिरुपति से पांच किमी. दूर है। यह मंदिर भगवान श्री वेंकटेश्वर विष्णु की पत्नी श्री पद्मावती लक्ष्मी जी को समर्पित है। कहा जाता है कि तिरुमला की यात्रा तब तक पूरी नहीं हो सकती जब तक इस मंदिर के दर्शन नहीं किए जाते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *