IMD’s forecast failed, no clouds rained in Himachal
हिमाचल प्रदेश में मौजूदा स्थिति चिंताजनक है, जहां बारिश और बर्फबारी की कमी से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के बावजूद बादल बरसने में नाकाम रहे हैं, जिससे न केवल कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है बल्कि पर्यटन क्षेत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
तापमान और मौसमी स्थिति:
लाहौल-स्पीति जैसे उच्च पर्वतीय इलाकों में न्यूनतम तापमान माइनस में पहुंच चुका है। ताबो में यह माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो इस मौसम के लिए असामान्य है। कुकुमसैरी और समदो जैसे इलाकों में भी तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में भी तापमान में कमी आई है, जैसे ऊना में अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
बारिश की स्थिति:
1 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच हिमाचल प्रदेश में औसतन 33.6 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 0.7 मिमी बारिश हुई है। मानसून के दौरान भी सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई, और 1 से 15 अक्टूबर तक एक बूंद भी नहीं बरसी।
प्रभाव:
कृषि पर असर:
बारिश की कमी से फसल उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति किसानों के लिए कठिनाई पैदा कर रही है।
पर्यटन पर असर:
बर्फबारी और ठंड का अनुभव करने के लिए हिमाचल आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी आ सकती है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जल स्रोतों पर असर:
बारिश की कमी से जल स्रोतों का सूखना और पानी की उपलब्धता में कमी एक बड़ी समस्या बन सकती है।
आने वाले दिनों में मौसम में सुधार और पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता है ताकि राज्य की प्राकृतिक और आर्थिक स्थिति को संतुलित किया जा सके। IMD को भी सटीक पूर्वानुमान देकर स्थिति से निपटने में मदद करनी चाहिए।
