Discussion on creating new districts in Himachal Pradesh resumes, CM Sukhu says, ‘Will not be formed now’
Dharamshala: हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दशकों से नए जिलों (Districts) के गठन की मांग लगातार उठती रही है। यह मुद्दा पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) के कार्यकाल में उठा था, जब रामपुर (Rampur) को जिला बनाने की पहल की गई थी। अब एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है।
किन क्षेत्रों से उठी मांग
कांगड़ा जिले में पालमपुर (Palampur), नूरपुर (Nurpur), देहरा (Dehra) और मंडी के सुंदरनगर (Sundernagar) को जिला बनाने की मांग समय-समय पर होती रही है।
सरकार ने कांगड़ा के बड़े आकार को देखते हुए नूरपुर (Nurpur) और देहरा (Dehra) को पुलिस जिलों (Police Districts) का दर्जा दिया है।
इसी तरह सोलन के बद्दी (Baddi) को भी पुलिस जिला बनाया गया है।
विधानसभा (Assembly) में उठा सवाल
सोमवार को तपोवन स्थित विधानसभा (Vidhan Sabha) में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक डा. जनक राज (Dr. Janak Raj) के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू (CM Sukhvinder Singh Sukhu) ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में नए जिलों के गठन पर कोई Proposal सरकार के पास लंबित नहीं है।
उन्होंने बताया कि General Administration Department ने इस बारे में पूरी जानकारी सरकार को दे दी है।
क्या 4 नए जिले बनने की तैयारी?
डॉ. जनक राज ने पूछा था कि क्या प्रदेश में चार और नए जिलों के गठन की तैयारी चल रही है और एक जिला बनाए जाने में अनुमानित कितना Budget खर्च होगा। CM ने स्पष्ट कहा—“अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।”
धूमल शासन में भी उठा मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल (Prem Kumar Dhumal) के दूसरे कार्यकाल में भी नए जिलों की मांग उठी थी। प्रशासनिक स्तर पर इस पर काम शुरू भी हुआ था, लेकिन प्रदेश की Geographical Size छोटी होने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
BJP के Organizational Districts
भाजपा ने कई संगठनात्मक जिलों (Organizational Districts) का गठन किया है।
कांगड़ा के अलावा तीन और नए संगठनात्मक जिले बनाए गए हैं।
मंडी के सुंदरनगर (Sundernagar) और शिमला के महासू (Mahasu) को भी संगठनात्मक जिला घोषित किया गया है।
कुल मिलाकर भाजपा के 17 Districts हैं, जिनमें से 5 Organizational Districts हैं।
कांग्रेस की तैयारी अधूरी
कांग्रेस में भी Shimla Urban क्षेत्र के लिए अलग कार्यकारिणी बनाने और Organizational Blocks बढ़ाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
दिलचस्प बात यह है कि वीरभद्र सिंह की सरकार नए जिलों और संगठनात्मक जिलों के गठन के पक्ष में नहीं थी, हालांकि उन्होंने कांगड़ा (Kangra) को Second Capital का दर्जा जरूर दिया था।
