हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और देवनगरी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहां कई देवी देवताओं के मंदिर है हिमाचल प्रदेश की खास बात यह है, कि पूरे प्रदेश के हर गांव में एक मंदिर जरूर है | हिमाचल प्रदेश में ऐसा कोई कार्यक्रम या उत्सव नहीं होता है, जो कि देवी देवताओं के बिना पूर्ण हो ऐसा ही एक मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की तहसील ज्वाली के गांव ठेहडू में आस्था भरा मंदिर स्थित है |
जिसे ठेरे वाली माता के नाम से जाना जाता है | इस मंदिर में पहुंचने के लिए धर्मशाला से आने वाले लोगों को जौंटा होकर जौंटा से इसकी दूरी लगभग 12 किलोमीटर दूर है और तलवाड़ा से होकर ज्वाली लव से इसकी दूरी लगभग 14 किलोमीटर दूर है |यह मंदिर आंवल पंचायत ठेहडू में स्थित है | इस मंदिर की ऐसी आस्था मानी जाती है कि जब 1971मे भारत और पाकिस्तान की लड़ाई लगी थी और बंगलादेश को आजाद करवाया था |
उस समय सरकार द्वारा पूरे भारत देश में व्लैक आऊट घोषित कर दिया था, लेकिन इस मंदिर के पास एक गद्दी समुदाय के लोगों का डेरा बैठा हुआ था और डेरे में आग जली हुई थी | जब पाकिस्तान का जहाज इस रास्ते से गुजरा और आग देखकर जो बम कांगड़ा फैंकने थे वह बम ठेहडू में गद्दी समुदाय के लोगों पर फैकने शुरू कर दिए उस समय ठेरे वाली माता ने उन लोगों की रक्षा करते हुए अपना एक हाथ गंवा दिया और गद्दी समुदाय के लोगों को बचा लिया आज भी इस मंदिर की काफी आस्था मानी जाती है कि जो भी लोग माता रानी से कुछ मांगता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है |
