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मणिकर्ण फागली में कनाश नृत्य की धूम

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जिला धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण में मनाए जा रहे फागली उत्सव के अंतिम दिन कनाश नृत्य की धूम रही। इस अवसर पर सजधज कर महिलाओं और ग्रामीणों ने फागली में आए देवताओं का आशीर्वाद लिया और महिलाओं ने माता नैना के चारों तरफ नृत्य किया और माता का आशीर्वाद लिया। घाटी की बहु-बेटियों ने पारंपरिक नृत्य का आयोजन इस बार भी किया। कनाश नृत्य माता पार्वती का पुरातन एवं पारंपरिक नृत्य है और गीत भी पुरातन है जो सिर्फ मणिकर्ण फागली उत्सव में ही गाए जाते हैं।

नैना माता के सम्मान में मनाये जाने वाले मणिकर्ण फागली उत्सव के तीसरे दिन सभी नैना माता के रथ को सजधज कर निकाला गया। फागली में शिरकत करने आये हुए घाटी के देवता रावल ऋषि उच धार, क्यानी देवता नाग, और कुड़ी नारायण उपस्थित रहे। दिन भर फागली मेले की धूम रही। घर घर में देवी देवता के देवालु और ग्रामीण भी सभी की मेहमान नवाजी में व्यस्त रहे। वहीं फागली उत्सव में सदियों पुरानी परम्परा को निभाने के लिए गांव की बहु, बेटियां सजधज कर आती है और माता के आंगन में देवरथों के इर्द-गिर्द गोल दायरे में पारम्परिक नृत्य नाचती है। ये नृत्य बहुत ही मनमोहक होता है। फागली में घाटी के लोगोँ के साथ-साथ मणिकर्ण आ रहे पर्यटकों ने खूब लुत्फ़ लिया और लोग फागली में खूब झूमने लगे। हर घर में मेहमाननवाजी का दौर शुरु हो गया है और हर घर में मेहमानों को तरह-तरह के पकवान परोसे जा रहे है।

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