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क़ैदी ने बना दी लव चेयर, जेल से कमा रहा है हज़ारों

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शिमला में फर्नीचर प्रदर्शनी लगी और ये जो महंगा फर्नीचर जो आप देख रहे है इसको बनाने वाले हाथ कभी गुनाहों से भरे थे पर अब ये लकड़ी को सुन्दर डिज़ाइन में बदलने का मादा रखतें हैं शिमला जेल विभाग ने ये प्रदर्शनी लगाई थी जिसमें राजकपूर यादव नाम के एक कैदी ने अपना बनाया फर्नीचर दिखाया |  पुलिस ने राजकुमार को एक किलो नशे के साथ पकड़ा था और अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है वो 2016 से जेल में बंद है | राजकपूर ने बताया कि फर्नीचर बना कर की कमाई से उसने 6 साल में साढ़े चार लाख रुपए अपने घर भेजें हैं |
राजकुमार कुर्सी-मेज और बेड से लेकर मॉड्यूलर किचन तक सारा फर्नीचर बनाते हैं. उसने एक शानदार लव चेयर भी बनाई है
राजकपूर यादव ने कहा कि जेल में आने से पहले भी वह यही काम करता था, गलत संगत में पड़ उसने ग़लत काम शुरू किया | पर अब जेल में फर्नीचर बना कर वो बुरी सोच से दूर है और अच्छे पैसे कमा कर परिवार भी पाल रहा है
प्रदेश की जेलों में बंद कई कैदी जेल विभाग की योजना हर हाथ को काम के चलते जेल में ही काम कर रहे हैं और उस से होने वाली कमाई से अपने घर का खर्च चला रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले राज कपूर यादव से एक किलो से ज्यादा चरस पकड़ी गई थी और एनडीपीएस एक्ट के तहत वह दोषी पाया गया था. इसे अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है और 2016 से जेल बंद है और अभी 14 साल की सजा बाकी है.राज कपूर यादव ने 2017 से शिमला की कंडा जेल से काम शुरू किया था. वह इसे आगे बढ़ाते गए और अब तक ये साढ़े चार लाख रुपए अपने घर भेज चुके हैं. ये कुर्सी-मेज और बेड से लेकर मॉड्यूलर किचन तक सारा फर्नीचर बनाते हैं. यहां तो इन्होंने एक शानदार लव चेयर भी बनाई है. हिमाचल जेल विभाग की ओर से कैदियों के उत्पादों की एक प्रदर्शनी राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में लगाई गई है. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन जेल विभाग की एडीजी सतंवत अटवाल ने किया. इसमें न केवल कैदियों के बनाए उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है बल्कि उन्हें बेचा भी जा रहा है. कैदियों ने बेहतरीन उत्पाद तैयार किए हैं. इसी प्रदर्शनी में 33 वर्षीय राज कपूर यादव के उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है.
बातचीत के दौरान राज कपूर यादव ने कहा कि 2016 में जेल में आने के बाद दिमाग में शैतानी भरी होती थी, कभी गुस्सा आता था तो कभी पछतावा होता था. तो कभी घर की टेंशन होती थी तो कभी पैसा कमाने के बारे में सोच सोच कर भी परेशानी होती थी. वह शादीशुदा है और इसके 2 बच्चे भी हैं. राज का कहना है कि 2017 के बाद हर हाथ को काम योजना के तहत काम शुरू किया तो अब सुकून महसूस होता है. उन्होंने कहा कि जेल में आने से पहले भी यही काम करते थे. इस काम में जेल विभाग के अधिकारियों से काफी सहयोग मिला है.

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