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 कभी भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज,आज बेरोज़गार है और पाय पाय के लिए तरस रहे हैं 

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विनोद कांबली कभी भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज हुआ करते थे। उनके हार्ड हिटिंग पावर को देखकर बड़े से बड़े क्रिकेट प्रेमी दंग रह जाते थे। विनोद कांबली ने अपने शुरुआती मात्र सात मैचों में ही 793 रन बनाकर तहलका मचा दिया था। ९० के दशक में  जब कोई बल्लेबाज 113.29 की स्ट्राइक रेट से टेस्ट मुकाबलों में रन कूटे तो सोच लीजिए, बैटिंग कितनी विध्वंसक रही होगी। १९९३ में  224 और 227 उनका बेस्ट स्कोर था। अब भारतीय क्रिकेट टीम का वह स्टार प्लेयर बेरोजगारी से परेशान है। इतना परेशान कि अपना परिवार चलाने के लिए मैदान पर कैसा भी काम करने को तैयार है।
50 साल के विनोद कांबली को अब पहचानना थोड़ा मुश्किल है। सफेद दाढ़ी और अब  काफी दुबले-पतले दिखते हैं। अक्सर गले में गोल्ड चेन, हाथ में  ब्रेसलेट और  बड़ी घड़ी में दिखने वाले कांबली अब उनके पास से सब कुछ  गायब हो गया है। यहां तक कि उनके पास जो मोबाईल है उसकी स्क्रीन टूटी हुई है ।
 फिलहाल विनोद कांबली बेरोजगार है और उनके पास काम करने के लिए कुछ भी नहीं है उनका घर बीसीसीआई से 30 हजार रुपये पेंशन से चलता है।  और यही उनकी कमाई का एकमात्र जरिया है।
 
सचिन तेंदुलकर बचपन के दोस्त हैं 
विनोद कांबली अपना क्रिकेट खेलने की जर्नी सचिन तेंदुलकर के साथ किया था। सचिन इनके बचपन के दोस्त हैं। सचिन से माली मदद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मै सचिन से अब उम्मीद नहीं रखता हूँ। लेकिन मै उनसे नाराज भी  नहीं हूँ जब  TMGA [तेंडुलकर मिडलसेक्स ग्लोबल अकादमी बना था तब उसका कार्यभार मुझे ही दिया था। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। भारत के लिए साल 2000 में आखिरी बार खेलने वाले कांबली ने महज 17 मैच के बाद टीम से बाहर हो गए थे। 23 साल की उम्र में जब उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला तब उनका औसत 54 का था। मगर अफसोस कि वह दोबारा टीम में नहीं लौटे।

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